पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए अब अमेरिका भी बीच में आ गया है। इसके कुछ घंटों बाद ही अब यह सवाल उठ रहा है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने समकक्ष इशाक डार से बात करने के बजाय सीधे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बात क्यों की? विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने एक बयान में पुष्टि की कि रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ से बात की और पहलगाम हमले की जांच में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ब्रूस का बयान सामने आने के तुरंत बाद, पाकिस्तान के सत्ता गलियारे में यह सवाल उठने लगा कि रुबियो ने सीधा शरीफ से क्यों बात की, डार से क्यों नहीं, जबतकि वह पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री भी हैं। ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि रुबियो ने शरीफ से सीधे बात करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ निराधार दावे करता रहा है।
पहलगाम आतंकवादी हमले के तुरंत बाद डार ने हमले में शामिल आतंकवादियों को "स्वतंत्रता सेनानी" कहा था। उन्होंने 24 अप्रैल को कहा था, "22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम जिले में हमले करने वाले लोग स्वतंत्रता सेनानी हो सकते हैं।" डार का ये बयान कश्मीर के ऐतिहासिक टूरिस्ट स्पॉट पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के दो दिन आया था।
बाद में, देश के संघीय सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि भारत सरकार पहलगाम हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में "निराधार और मनगढ़ंत आरोपों" के आधार पर हमला करने की तैयारी कर रही थी।
दरअसल, घटना के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि यह हमला नागालैंड से लेकर कश्मीर तक, मणिपुर में अशांति समेत भारत में केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों की प्रतिक्रिया थी और यह हमला "घरेलू" था।
आसिफ ने अपने एक चौंकाने वाले खुलासे में आतंकवादी संगठनों को समर्थन, ट्रेनिंग और पैसा देने के पाकिस्तान के इतिहास को स्वीकार किया था, और इसे उन्होंने पश्चिम देशों के लिए करने वाला "गंदा काम" बताया था।
आसिफ ये बयान शायद पाकिस्तान को पसंद नहीं आया। क्योंकि उन्होंने ये बयान ऐसे समय पर दिया, जब भारत और पाकिस्तानी के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है।
रुबियो की शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री जयशंकर से बातचीत
अमेरिकी विदेश मंत्री ने शरीफ से बातचीत करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ सहयोग के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर के साथ बुधवार रात को फोन पर हुई अपनी बातचीत में रुबियो ने पहलगाम में ‘‘भयावह’’ आतंकवादी हमले में लोगों के मारे जाने पर दुख जताया और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ सहयोग को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता जताई।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने शरीफ से इस हमले की जांच में इस्लामाबाद के सहयोग का आह्वान किया।
इस बीच, शरीफ ने पहलगाम हमले से पाकिस्तान को जोड़ने की भारत की कोशिश को खारिज कर दिया और निष्पक्ष जांच के लिए पाकिस्तान की मांग दोहराई। उन्होंने अमेरिका से भारत पर “भड़काऊ बयान” देने से बचने के लिए दबाव डालने की भी अपील की।
शरीफ ने सिंधु जल संधि का भी मुद्दा उठाया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह 240 मिलियन लोगों की जीवन रेखा है, और दावा किया कि इसमें किसी भी पक्ष की ओर से एकतरफा पीछे हटने का कोई प्रावधान नहीं है।