UPL Q2 Results: ₹996 करोड़ के मुनाफे से ₹189 करोड़ के घाटे में कंपनी, ये रही वजह

UPL Q2 Results: दिग्गज एग्रीकेमिकल कंपनी यूपीएल के लिए सितंबर तिमाही किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। पिछले साल की सितंबर तिमाही में इसे 996 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था और इस साल यह मुनाफे से घाटे में आ गई और सितंबर तिमाही में इसे 189 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वहीं इस दौरान रेवेन्यू भी 12,507 करोड़ रुपये से 18.70 फीसदी गिरकर 10,170 करोड़ रुपये पर आ गया

अपडेटेड Oct 30, 2023 पर 4:58 PM
UPL ने इस पूरे वित्त वर्ष 2024 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान में कटौती कर दी है।
     
     
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    UPL Q2 Results: दिग्गज एग्रीकेमिकल कंपनी यूपीएल के लिए सितंबर तिमाही किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। पिछले साल की सितंबर तिमाही में इसे 996 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था और इस साल यह मुनाफे से घाटे में आ गई और सितंबर तिमाही में इसे 189 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वहीं रेवेन्यू की बात करें तो इस दौरान रेवेन्यू भी 12,507 करोड़ रुपये से 18.70 फीसदी गिरकर 10,170 करोड़ रुपये पर आ गया। शेयरों की बात करें तो बीएसई पर यह 3.64 फीसदी गिरकर 538.40 रुपये के भाव (UPL Share Price) पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 4.77 फीसदी टूटकर 532.10 रुपये तक आ गया था।

    क्यों कमजोर रही UPL के लिए सितंबर तिमाही

    यूपीएल कॉरपोरेशन के सीईओ माइक फ्रैंक का के मुताबिक वैश्विक एग्रोकेमिकल उद्योग एक कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तो इंवेंटरी काफी अधिक है और दूसरे कीमतों को लेकर कॉम्पटीशन काफी अधिक हो गया है। वैश्विक स्तर पर मांग में सुस्ती से इसे जूझना पड़ रहा है। इन सब वजहों से डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सबसे पहले तो अपनी इंवेंटरी कम करने यानी डीस्टॉकिंग पर फोकस किया और नया माल सस्ती कीमतों पर खरीदने पर जोर दिया ताकि इंवेंटरी की औसत लागत कम हो सके। पहली छमाही में अमेरिका और ब्राजील में डीस्टॉकिंग ने अधिक असर डाला। वैश्विक दिक्कतों और करेंसी से जुड़ी चुनौतियों के चलते मार्जिन पर दबाव बना रहा और सितंबर तिमाही में EBITDA मार्जिन सिकुड़कर सालाना आधार पर 22.5 फीसदी से 15.5 फीसदी पर आ गया।


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    अब आगे क्या है रुझान

    कंपनी ने इस पूरे वित्त वर्ष 2024 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान में कटौती कर दी है। पहले इसने 1-5 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान लगाया था लेकिन अब इसे फ्लैट कर दिया है। कंपनी ने EBITDA गाइडेंस को भी 3-7 फीसदी से घटाकर 0 से (-) 5 फीसदी कर दिया है। इस बीच कंपनी अपने बढ़ते कर्ज को कम करने के लिए लागत में कटौती पर भी जोर दे रही है।

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    इसकी योजना अगले दो वर्षों में अपना खर्च 10 करोड़ डॉलर कम करने की है और यह योजना अभी तक एकदम सही रास्ते पर है। इससे जो भी फायदा होगा, उसमें से 5 करोड़ डॉलर इसी वित्त वर्ष में हो जाएगा जिसमें से अधिकतर तो इसी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में होगा। ग्रॉस डेट की बात करें तो इस वित्त वर्ष इसे 50 करोड़ डॉलर घटाने का लक्ष्य है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सुधार दिख सकता है क्योंकि उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका और यूरोप में बुवाई का समय शुरू होने वाला है।

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