सितंबर तिमाही में देश के सरकारी और निजी सेक्टर के टॉप बैंकों ने बड़ी मात्रा में लोन राइट ऑफ किया। सात के टॉप बैकों में जिन्होंने अपनी तिमाही नतीजे जारी किए हैं, उन्होंने बड़ी मात्रा में राइट ऑफ किया है और यह 14 बैंकों के डेटा के एनालिसिस में मनीकंट्रोल ने निकाला है। जिन सात बैंकों की बात हो रही है, वे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank-PNB), इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) और केनरा बैंक (Canara Bank) हैं।
सबसे अधिक Write-off किया HDFC Bank ने
निजी सेक्टर में देश के सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने सितंबर तिमाही में सबसे अधिक राइट ऑफ किया। इसने 3250 करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ किया जबकि एक साल पहले इसने 3000 करोड़ रुपये के लोन को राइट ऑफ किया था। ICICI Bank का लोन राइट ऑफ सालाना आधार पर 1103 करोड़ रुपये से बढ़कर 1922 करोड़ रुपये, Axis Bank का 1700 करोड़ रुपये से उछलकर 2671 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
सरकारी बैंकों की बात करें तो सबसे अधिक पीएनबी ने लोन राइट ऑफ किया है और सितंबर 2023 तिमाही में लोन राइट ऑफ का आंकड़ा 2614 करोड़ रुपये से बढ़कर 3665 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं केनरा बैंक के लिए यह आंकड़ा 2,798 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,889 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बड़े बैंकों में जिसने राइट ऑफ नहीं बढ़ाया, उसमें इंडसइंड बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। सितंबर तिमाही में इंडसइंड बैंक का राइट ऑफ सालाना आधार पर 1168 करोड़ रुपये से गिरकर 535 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का राइट ऑफ 8599 करोड़ रुपये से फिसलकर 6018 करोड़ रुपये पर आ गया।
मंझले और छोटे बैंकों में मिला-जुला रुझान
टॉप के अधिकतर बैंकों ने सितंबर तिमाही में राइट ऑफ बढ़ाया है तो दूसरी तरफ मंझले और छोटे बैंकों में मिला-जुला रुझान रहा। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लिए सितंबर तिमाही में राइट ऑफ का आंकड़ा सालाना आधार पर 9514 करोड़ रुपये से गिरकर 2045 करोड़ रुपये, IDBI Bank का 5209 करोड़ रुपये से फिसलकर 94 करोड़ रुपये और Yes Bank का राइट ऑफ लुढ़ककर 15995 करोड़ रुपये से 2446 करोड़ रुपये पर आ गया।
RBL के लिए यह आंकड़ा 578 करोड़ रुपये से गिरकर 339 करोड़ रुपये, फेडरल बैंक के लिए 185 करोड़ रुपये से फिसलकर 13 करोड़ रुपये, CSB Bank के लिए 11 करोड़ रुपये से लुढ़ककर 1 करोड़ रुपये पर आ गया। वहीं दूसरी तरफ करूर वैश्य बैंक (Karur Vysya Bank) का लोन राइट ऑफ सालाना आधार पर 199 करोड़ रुपये से उछलकर 710 करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का राइट ऑफ 1287 करोड़ रुपये से बढ़कर 3500 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
कारोबार को लेकर मिल सकता है सपोर्ट
बैंक लोन को राइट ऑफ तब करते हैं, जब कर्जदारों से इसके वापस मिलने के चांस नहीं रहते हैं। आमतौर पर बैंकों को राइट ऑफ की गई लोन राशि का 100 फीसदी प्रोविजन के रूप में अलग रखना होता है जो इसके मुनाफे कमाने की क्षमता पर असर डालता है। केंद्रीय बैंक RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में बैंकों ने 2.09 लाख करोड़ रुपये के लोन को राइट ऑफ किया था और इस प्रकार पांच वर्षों में राइट ऑफ का आंकड़ा उछलकर 10.57 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। राइट ऑफ ने बैंकों को अपने ग्रॉस एनपीए को मार्च 2023 में 10 साल के निचले स्तर एडवांसेज के 3.9 फीसदी तक कम करने में मदद की।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ बैंकों को रिकवरी में दिक्कतें आईं और उन्होंने पिछले साल की तुलना में अधिक राइट-ऑफ का सहारा लिया। Emkay Global Services के हेड (BFSI) आनंद दामा के मुताबिक बैंकों ने काफी अधिक राइट ऑफ दिखाया है तो वे बिजनेस फ्लो को बनाए रखने पर काम कर सकते हैं। केयर ऐज के लीड एनालिस्ट (BFSI) विजय सिंह गौड़ के मुताबिक बैंकों की एसेट क्वालिटी सुधरी है जिससे उन्हें रिकवरी और बिजनेस मेंटेनेंस पर काम करने के लिए प्रेरित करेगी।