Parle G Biscuit: 30 साल में सिर्फ 1 रुपये बढ़े दाम, आज भी ‘छोटा पैक’ 5 रुपये, आखिर कैसे कंपनी कमा रही है बंपर मुनाफा?

Parle G Biscuit: देश में आज भी पार्ले-जी बिस्किट को लोग बड़े चाव से खाते हैं। आज से 30 साल पहले इस छोटे पैक की कीमत सिर्फ 4 रुपये थी। इसके बाद इसमें 1 रुपये की बढ़ोतरी की गई। कंपनी ने इस प्रोडक्‍ट के दाम कई दशकों तक नहीं बढ़ाएं. इसके पीछे जानिए क्या है कंपनी खास रणनीति

अपडेटेड Mar 04, 2024 पर 4:16 PM
Parle G Biscuit: पार्ले-जी का एक छोटा पैकेट 1994 में 4 रुपये का मिलता था।

Parle G Biscuit: पार्ले-जी (Parle-G) बिस्किट का स्वाद आज भी लोगों की जुबां पर बरकार है। भारत में ये सिर्फ एक बिस्किट का ब्रांड भर नहीं है। बल्कि इसके साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। जब भी पार्ले-जी बिस्किट का जिक्र होता है। हम अपने बचपन में लौट जाते हैं। समय के साथ पार्ले-जी बिस्किट में कई बदलाव हुए। लेकिन इसका स्वाद नहीं बदला। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके कीमत में कोई भारी बदलाव नहीं हुए। 30 साल से छोटे पैक के दाम में सिर्फ 1 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद कंपनी मोटा मुनाफा कमा रही है।

साल 1994 में पार्ले-जी बिस्किट के छोटे पैक की कीमत 4 रुपये थी। कई दशकों तक इसके दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई। फिर कोरोना काल में साल 2021 में छोटे पैके के दाम में 1 रुपये की बढ़ोतरी कर 5 रुपये कर दिया गया। 1994 से आज 2024 तक में छोटे पैक के दाम में सिर्फ 1 रुपये की बढ़तोरी हुई है। आज भी यह 5 रुपये मिल रहा है।

पार्ले-जी कैसे कमा रही है मुनाफा?


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्विगी के डिजाइन डायरेक्टर सप्तर्षि प्रकाश ने इस बारे में काफी कुछ लिखा है। उन्होंने लिंक्डिन पोस्ट में लिखा है कि छोटे पैक का मतलब होता है जो हाथ में आ जाए। उन्होंने तर्क देते हुए बताया कि पार्ले-जी कंपनी ने छोटे पैक के की कीमतों को स्थिर रखने के लिए बेहतर रणनीति से काम किया। प्रकाश ने बताया कि पहले पार्ले-जी का छोटा पैकेट 100 ग्राम का होता था। इसे फिर घटाकर 92 ग्राम के आसपास कर दिया गया। इसके बाद यह 88 ग्राम का हो गया। मौजूदा समय में पार्ले-जी के छोटे पैक का वजन सिर्फ 55 ग्राम रह गया है। कुल मिलाकर 194 से अब तक इसके वजन में 45 फीसदी की कटौती हो चुकी है।

पार्ले-जी ने लोगों के दिमाग को समझा

parle-g लोगों के इस मनोविज्ञान को बहुत आसानी से समझ गई है। यह वजह रही कि पिछले 30 साल से इसकी कीमतों में भारी इजाफा नहीं हुआ। यहां तक 1994 से 2021 तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। कमोडिटी के बढ़ते भाव, कामकाज, ब्रांडिंग और पैकेजिंग वगैरह के बढ़ते खर्च से मुकाबला करने के लिए पार्ले-जी ने धीरे धीरे कर अपने पैकेट का वजन कम करना शुरू किया।

जानिए पार्ले-जी की शुरुआत कब हुई? 

पार्ले-जी की शुरुआत साल 1929 में हुई थी। पार्ले-जी ने पहली बार 1938 में पार्ले-ग्‍लूको (पार्ले-ग्‍लूकोज) नाम से बिस्किट का उत्पादन शुरू किया था। साल 1940- 50 के दशक में में कंपनी ने भारत के पहले नमकीन बिस्‍किट 'मोनाको' को पेश किया था।

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