US Deportation News: अमेरिका से पनामा भेजे गए 12 अवैध भारतीय अप्रवासियों को लेकर एक फ्लाइट रविवार (23 फरवरी) शाम को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचा। यह दावा 'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट में किया गया है। यह पनामा से वापस लाए जाने वाले भारतीयों का पहला जत्था है। इससे पहले अमेरिका ने लगभग 332 अवैध अप्रवासियों को भारत वापस भेजा था, जो अमेरिकी धरती पर अवैध तरीके से घुसने की कोशिश कर रहे थे।
पनामा, कोस्टा रिका और निकारागुआ निर्वासित प्रवासियों को वापस भेजने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस प्रयास के तहत अमेरिका विभिन्न एशियाई देशों से हिरासत में लिए अवैध प्रवासियों को इस मध्य अमेरिकी देशों में शिफ्ट कर रहा है। उसके बाद वहां से उनके देश वापस भेज रहा है। इन निर्वासितों को पनामा के एक होटल में रखा गया है।
'इंडिया टुडे' ने दावा किया है कि पनामा से भारतीय नागरिकों का पहला जत्था तुर्की एयरलाइंस की फ्लाइट से इस्तांबुल होते हुए नई दिल्ली पहुंचा। निर्वासित लोगों में से चार पंजाब से और तीन-तीन हरियाणा और उत्तर प्रदेश से थे। एक व्यक्ति की पहचान फिलहाल नहीं हो पाई है।
दिल्ली से पंजाब के विभिन्न जिलों के चार निवासियों को एक फ्लाइट से अमृतसर भेजा गया। पनामा भेजे गए 299 लोगों में भारतीय प्रवासियों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि उसने पनामा के लिए निर्वासन उड़ानों के बारे में कुछ खबरें देखी हैं। नई दिल्ली खबरों का सत्यापन कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक हैं या नहीं।
इससे पहले, अमेरिका से तीन जत्थों में कुल 332 भारतीयों को भारत भेजा जा चुका है। ट्रंप प्रशासन की अवैध अप्रवासियों पर बढ़ती कार्रवाई के बीच यह निर्वासन हुआ है। पनामा आए कुल 299 अवैध अप्रवासियों में से सिर्फ 171 लोगों ने अपने मूल देशों में लौटने की सहमति दी है।
जिन 98 निर्वासितों ने अपने देशों में वापस जाने से इनकार कर दिया था, उन्हें पनामा के डेरियन प्रांत के एक शिविर में भेज दिया गया है। कोस्टा रिका दूसरा देश है जो अमेरिका में अवैध अप्रवासियों को वापस लाने के लिए पुल के रूप में काम करने के लिए सहमत हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान एक संयुक्त बयान जारी किया गया। उसमें अवैध आव्रजन निपटने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले पर भारत में उच्चतम स्तर पर चर्चा हुई है। वाशिंगटन में भी इस मामले पर विचार विमर्श हुआ।
राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो की सहमति के बाद भारतीय निर्वासित तीन उड़ानों से पनामा पहुंचे थे। मुलिनो ने इस बात पर सहमति जताई थी कि निर्वासितों के लिए पनामा पुल की भूमिका निभाएगा। ट्रंप प्रशासन ने अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने वाले लाखों लोगों को निर्वासित करने की योजना बनाई है।