नए साल की शुरुआत सब्जी उत्पादक किसानों के लिए कमाई का सुनहरा अवसर लेकर आई है। जनवरी के महीने में अगेती भिंडी की खेती करके किसान प्रति एकड़ लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं। अगेती भिंडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार होकर बाजार में पहुंच जाती है। जब इसकी आवक कम होती है, तब इसके दाम काफी ऊँचे मिलते हैं, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है। यही कारण है कि अगेती भिंडी की खेती सब्जी उत्पादकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। किसानों के लिए यह फसल न केवल तेज लाभ देने वाली है, बल्कि इसे लगाने में समय और संसाधनों की कम खपत होती है।
अगेती भिंडी की मांग हर साल बढ़ती जा रही है, और इसे सही समय पर बोकर, सही देखभाल के साथ किसानों को 40-50 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार फसल मिल सकती है। यही वजह है कि इसे किसानों के लिए सही निवेश और सुरक्षित कमाई वाला विकल्प माना जाता है।
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक साओन चक्रवर्ती लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि, अगेती भिंडी की बुवाई 20 जनवरी से 15 फरवरी के बीच सबसे उपयुक्त है। उत्तर और मध्य भारत में पाले और अत्यधिक ठंड से फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि बसंत पंचमी के बाद ही बुवाई करें। सही समय पर बुवाई करने से फसल 40-50 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।
अगेती भिंडी की फसल जब मंडी में आती है, उस समय आवक कम होती है। इससे किसानों को 70-100 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल सकता है। अगर फसल की देखभाल सही तरीके से की जाए, तो एक एकड़ से लाख रुपये या उससे अधिक की आमदनी संभव है।
भिंडी की लंबी पैदावार के लिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है। जुताई के समय सड़ा हुआ गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाना लाभदायक होता है। रासायनिक उर्वरकों में प्रति एकड़ एक बैग डीएपी, एक बैग पोटाश और 20-30 किलो यूरिया का उपयोग फसल के लिए फायदेमंद रहता है।
भिंडी की जड़ों में निमेटोड (गांठ की समस्या) बड़ी चुनौती है। इससे बचाव के लिए बेसल डोज के साथ 5 किलो कार्टप हाइड्रोक्लोराइड या कार्बोफ्यूरान का मिश्रण किया जा सकता है। बेहतर पैदावार के लिए मेड विधि सबसे कारगर मानी जाती है। इसमें 18-18 इंच की दूरी पर मेड बनाकर बीज बोए जाते हैं। प्रति एकड़ 2.5-3 किलो बीज पर्याप्त होता है।
अधिक उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता के लिए किसान एडवांटा की ‘राधिका’, नामधारी की ‘सोनम’ या निजीवीडू जैसी हाइब्रिड किस्में चुन सकते हैं। बुवाई से पहले बीजों का कार्बेंडाजिम या थीरम से उपचार करना जरूरी है। साथ ही खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडा मेथिलीन का छिड़काव फसल को सुरक्षित रखता है।