बिहार के छपरा जिले के किसान उन्नत किस्म के प्याज की खेती में काफी सक्रिय हैं। हालांकि, अच्छे और भरोसेमंद बीज की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई किसान हाजीपुर, दिघवारा, घोड़हट जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों तक बीज लेने जाते हैं, लेकिन इस दौरान कई बार ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में खेत में बोए गए बीज से अच्छी उपज नहीं मिल पाती, और मेहनत के बावजूद किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस वजह से प्याज की खेती में लागत बढ़ जाती है और किसानों का मनोबल भी कम होता है।
इसके बावजूद, छपरा के कुछ किसानों ने खुद उन्नत किस्म के बीज तैयार करना शुरू कर दिया है, जिससे वे अपनी फसल के साथ-साथ अन्य किसानों की भी मदद कर सकते हैं। यही प्रयास इस क्षेत्र की प्याज खेती को और मजबूत और लाभकारी बना रहा है।
दूर-दूर से आते हैं किसान अच्छे बीज के लिए
प्याज की खेती के लिए अच्छे बीज की मांग हमेशा रहती है। छपरा के कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो खुद उन्नत किस्म के बीज तैयार करते हैं और अपने साथ-साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध कराते हैं। ऐसे किसानों पर अन्य किसानों का भरोसा बहुत अधिक होता है, क्योंकि उनके बीज से अच्छी उपज होती है।
उमेश प्रसाद की नर्सरी में उपलब्ध उन्नत वैरायटी
छपरा जिले के मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव निवासी किसान उमेश प्रसाद खुद उन्नत वैरायटी का प्याज का बीज तैयार करते हैं। उनके पास गौरांग और नासिक वैरायटी उपलब्ध है, जो सारण की धरती में भारी मांग में हैं। उमेश अपने खेत में भी इन्हीं वैरायटी को लगाकर अच्छी पैदावार करते हैं, जिससे अन्य किसानों का भरोसा उनके बीज पर बढ़ जाता है।
किसान उमेश के पास प्याज का बीज पूरी तरह तैयार है। प्याज लगाने वाले किसान पहले से ही बीज के लिए एडवांस बुकिंग कर रहे हैं। मौसम अनुकूल होते ही प्याज की बुवाई शुरू हो जाएगी।
उमेश प्रसाद से जानें खासियत
किसान उमेश बताते हैं कि गौरांग और नासिक वैरायटी के प्याज की मार्केट में जबरदस्त मांग है। इस प्याज का वजन लगभग 150 से 200 ग्राम तक होता है। खेत से निकलने के बाद भी जल्दी खराब नहीं होता और लास्टिंग बहुत अच्छी है। इसके अलावा स्वाद भी बेहतरीन होता है। इनकी बुवाई के 120 दिन में प्याज तैयार हो जाता है, जिससे किसान कम लागत में ज्यादा लाभ ले सकते हैं।
शीतलपुर नर्सरी में उपलब्ध
उमेश प्रसाद की खुद की नर्सरी शीतलपुर बाजार के पास है। यहां से किसान सीधे उन्नत वैरायटी के प्याज का बीज खरीद सकते हैं। जनवरी के आखिर तक बीज पूरी तरह तैयार हो जाएगा और मौसम खुलते ही बुवाई भी शुरू हो जाएगी।