Guava Cultivation: अमरूद की इन 2 देसी वैरायटी ने बदल दी किसान की किस्मत, पूरे साल होती है कमाई

Guava Cultivation: छपरा के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फल-फूल की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। इससे कम समय में अच्छी कमाई हो रही है और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। सोनपुर प्रखंड के पहलेजा गांव के किसान सुरेंद्र सिंह इस बदलाव की एक सफल मिसाल हैं

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 1:01 PM
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Guava cultivation: एक पेड़ से औसतन 4-5 क्विंटल तक अमरूद निकल आता है

छपरा के किसान अब केवल पारंपरिक फसल तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब वे कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लिए फल-फूल की बागवानी अपना रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में काफी बढ़ोतरी हुई है और साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। सोनपुर प्रखंड के पहलेजा गांव निवासी सुरेंद्र सिंह इस बदलाव के अच्छे उदाहरण हैं। सुरेंद्र सिंह ने हाजीपुर में अमरूद की बागवानी देखी और उनसे प्रेरणा लेकर जिले के गरखा प्रखंड के अडूपुर गांव के पास 10 एकड़ जमीन लीज पर लेकर बागवानी शुरू की। उन्होंने भगवानपुरी और वाराणसी वैरायटी के अमरूद लगाए, जो कम मेहनत में साल में दो-तीन बार फल देते हैं। फल तोड़ने और देखभाल के लिए उन्होंने रोज़ाना 10-15 लोगों को काम पर रखा।

सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इन वैरायटी में मेहनत कम है, बिक्री आसान है और पूरे साल पेड़ पर फल रहते हैं। उनका प्रयास न केवल उनकी आमदनी बढ़ा रहा है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

हाजीपुर से मिला नया आइडिया


सुरेंद्र सिंह किसी काम से हाजीपुर गए थे। वहां उन्होंने अमरूद की बागवानी देखी और उनका मन भी बागवानी करने को हुआ। प्रेरणा मिलने के बाद उन्होंने गरखा प्रखंड के अडूपुर के पास 10 एकड़ जमीन लीज पर लेकर भगवानपुरी और वाराणसी वैरायटी के अमरूद लगाए।

जबरदस्त फलन, रोजगार भी

सुरेंद्र सिंह के पेड़ साल में दो से तीन बार फल देते हैं। फल तोड़ने और देखभाल के लिए प्रतिदिन 10-15 लोग काम पर रखे गए हैं। उनका कहना है कि फलन बहुत अच्छा होता है और स्वाद भी बेहतरीन है।

मेहनत कम, बिक्री आसान

इन वैरायटी के पेड़ों में ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती। पूरे साल पेड़ पर फल रहते हैं, जिन्हें आसानी से बाजार में बेचकर कमाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि एक कट्ठा में 6-8 पौधे लगाए जा सकते हैं और एक पेड़ से 50 किलो से 1 क्विंटल तक फलन होता है। अगस्त महीने में अमरूद लगाने को सबसे उत्तम माना जाता है।

दूसरों की मदद कर रहे हैं

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी लोकल वैरायटी में मिठास ज्यादा होती है और इसका स्वाद बाजार में सबसे बेहतर माना जाता है। अन्य किसान उनके पास आकर अमरूद की बागवानी का आइडिया मुफ्त में ले सकते हैं। कई किसान अब उनकी मदद से बागवानी कर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

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