अगर आप खेती में कम पानी और देखभाल के साथ बेहतर मुनाफा चाहते हैं, तो कपास एक स्मार्ट विकल्प बन सकता है। ये फसल न केवल कम सिंचाई की मांग करती है, बल्कि इसकी खेती आधुनिक तकनीकों के साथ और भी आसान हो जाती है। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि कपास के लिए दोमट गिट्टी मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। खेत की तैयारी में 2–3 बार जुताई जरूरी होती है, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और खरपतवार न पनपे।
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें और पलेवा यानी हल्की सिंचाई के बाद एक-दो बार फिर जुताई और पाटा लगाकर खेत को पूरी तरह समतल करें। दीमक की समस्या वाले खेतों में बुवाई से पहले क्यूनालफॉस 1.5% (6 किग्रा प्रति बीघा) ज़रूर मिलाएं, ताकि फसल की जड़ों की रक्षा हो सके और बेहतर उत्पादन मिले।
बीज, रोग नियंत्रण और सिंचाई
बीटी कपास की बुवाई के लिए 475 ग्राम का एक पैकेट प्रति बीघा पर्याप्त है, साथ में 10% नॉन-बीटी बीज खेत के किनारों पर लगाना चाहिए। उन्नत किस्मों में आरसीएच 650 बीजी, एमआरसी 7351 बीजी, जेकेसीएच 1947 बीजी आदि प्रमुख हैं। जड़ गलन रोग से बचाव के लिए बुवाई से पहले जिंक सल्फेट और कार्बोक्सिन या ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक उत्पादों से बीजों का उपचार करें। कतार से कतार की दूरी 108 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 35–40 दिन बाद करें, फिर 25–30 दिन के अंतराल पर 4–5 सिंचाई करें।
कीट नियंत्रण, खाद और उपज बढ़ाने के उपाय
कपास में सफेद मक्खी, माहू, थ्रिप्स जैसे चूसक कीटों के लिए इमिडाक्लोप्रिड, थायोमेथॉक्साम, फिप्रोनिल और प्रोपरगाइट जैसे कीटनाशकों का समय पर छिड़काव जरूरी होता है। फसल की चुगाई 4–5 बार करें और कपास के अवशेष तुरंत खेत से हटा दें, ताकि अगले वर्ष कीटों का प्रकोप कम हो। अच्छी उपज के लिए प्रति बीघा गोबर की जैविक खाद के साथ 22.5 किग्रा नत्रजन और 5 किग्रा फॉस्फोरस दें। पहली निराई-गुड़ाई पहली सिंचाई के बाद करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमेथालिन का छिड़काव करें। उन्नत विधियों से कपास की 5 से 75 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।