सर्दियों का मौसम आते ही बाजार और खेतों में गाजर की भरमार देखने को मिलती है। ये मौसम गाजर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि ठंडे मौसम में गाजर का रंग और स्वाद बेहतर होता है। अगर आप घर के बग़ीचे या खेत में गाजर उगाने की सोच रहे हैं, तो सही किस्म का चयन और देखभाल बेहद जरूरी है। गाजर न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि व्यापार के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके अलावा गाजर स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है क्योंकि इसमें विटामिन A, खनिज और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं।
सही मिट्टी, उपयुक्त तापमान और पर्याप्त सिंचाई के साथ गाजर की पैदावार अच्छी होती है। अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो आप कम समय में बेहतर और लाभकारी फसल उगा सकते हैं।
गाजर की गुणवत्ता और रंग पर तापमान का असर पड़ता है। 18–24°C तापमान और गहरी, भुरभुरी हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। लोकप्रिय उन्नत किस्मों में पूसा केसर, नेन्टिस, पूसा मंदाकिनी, सलेक्शन-5 और पूसा नयनज्योति शामिल हैं।
कतार से कतार 30 सेमी और पौधे से पौधे 8–10 सेमी दूरी रखें। 5–6 किलो बीज प्रति हैक्टेयर पर्याप्त है। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें और निराई-गुड़ाई से पौधों को खरपतवार से बचाएं।
गोबर की खाद 250 क्विंटल प्रति हैक्टेयर, 60 किलो नत्रजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 120 किलो पोटाश खेत में डालें। नत्रजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस-पोटाश की पूरी मात्रा पहली जुताई में डालें। शेष नत्रजन 45 दिन बाद खड़ी फसल में दें।
कट वर्म और पत्ती धब्बा जैसी समस्याओं से सावधानी रखें। मेंकोजेब और डाइनोकेप जैसी दवाओं से छिड़काव कर नियंत्रण करें। गाजर की जड़ें 60–85 दिन में तैयार होती हैं। देर से खुदाई करने पर गाजर खराब हो सकती है।