छतरपुर जिले में इस समय बढ़ती ठंड और लगातार कम होते तापमान ने किसानों की फसलों की चिंता बढ़ा दी है। टमाटर, मिर्च, बैंगन और फूलगोभी जैसी सब्जियों की फसलें पाले और शीत लहर की चपेट में आने लगी हैं। ऐसी परिस्थिति में कई किसान अपने खेतों में देसी उपाय अपनाकर फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। तेजराम जैसे किसान रात और सुबह खेत के चारों ओर धुआं करते हैं, ताकि पाले का असर कम हो और फसलें सुरक्षित रहें। इसके अलावा हल्की सिंचाई और समय-समय पर सल्फर का छिड़काव भी किया जाता है। कृषि विभाग और वैज्ञानिकों ने भी इस देसी तरीके को प्रभावी बताया है।
किसानों का कहना है कि यह पुराना जुगाड़ सालों से काम कर रहा है और इस उपाय से लाखों की फसलें सुरक्षित रहती हैं। इस मौसम में फसल सुरक्षा के लिए ये तरीके बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।
किसान भाईयों ने अपनाया देसी जुगाड़
किसान तेजराम ने बताया कि उन्होंने 10 बीघा जमीन में सब्जियां लगाई हैं, लेकिन कम धूप और कोहरे की वजह से फसलें पाले की चपेट में आ रही थीं। इसे बचाने के लिए उन्होंने रात और सुबह खेत के चारों तरफ धुआं किया। यह तरीका उनके अनुभव के अनुसार पाले से बचाने में बेहद असरदार है।
धुआं करने का तरीका और असर
किसान तेजराम बताते हैं कि रात में 10 बजे से और सुबह भी खेत के चारों ओर धुआं किया जाता है। यह धुआं हवा में फैलकर ओस और पाले के असर को कम करता है। साथ ही किसान हल्का छिड़काव और सिंचाई भी करते हैं। कृषि वैज्ञानिकों और विभाग ने भी इस उपाय को प्रभावी बताया है।
फसल बचाने का पुराना और कारगर तरीका
ये देसी तरीका सालों से अपनाया जा रहा है और किसानों के अनुसार ये पाले से फसलों की सुरक्षा करता है। तेजराम कहते हैं कि इस तरीके से लाखों की फसल सुरक्षित रहती है और किसान भावी नुकसान से बचते हैं।