देश के ज्यादातर किसान भाई आज भी गेहूं की खेती वही पुराने ढर्रे पर करते आ रहे हैं, जैसे सालों से करते थे। बीज बो दिया, पानी दे दिया और बस फसल भगवान भरोसे छोड़ दी। लेकिन बदलते मौसम, बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के दौर में अब खेती में थोड़ा दिमाग लगाना भी जरूरी हो गया है। अगर गेहूं की फसल में सही समय पर सही मात्रा में खाद डाल दी जाए और शुरुआती दिनों में खरपतवार को बढ़ने से रोक लिया जाए, तो बिना ज्यादा खर्च किए भी पैदावार बढ़ाई जा सकती है। कई किसान यह सोचते हैं कि ज्यादा खाद डालने से ही ज्यादा उत्पादन होगा, जबकि सच्चाई यह है कि संतुलित खाद और सही तकनीक ही फसल को मजबूत बनाती है।
वहीं, खरपतवार अगर समय पर न हटाए जाएं तो यही फसल का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाते हैं। थोड़े से वैज्ञानिक और आसान उपाय अपनाकर किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं और गेहूं की खेती को ज्यादा फायदेमंद बना सकते हैं।
अच्छी उपज के लिए पोषण जरूरी
गेहूं की फसल की मजबूत बढ़वार और भरपूर दाने के लिए संतुलित पोषण बहुत जरूरी होता है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर 60 किलो नत्रजन और 46 किलो फॉस्फोरस देने से फसल अच्छी रहती है। इससे जड़ें मजबूत बनती हैं और बालियों में दाने अच्छे भरते हैं।
नत्रजन खाद को एक बार में न देकर दो या तीन हिस्सों में देना ज्यादा फायदेमंद रहता है। एक हिस्सा बुआई के समय, दूसरा पहली सिंचाई के बाद और तीसरा बालियां निकलते वक्त दें। वहीं फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुआई के समय ही खेत में मिलाना सही रहता है।
खरपतवार से होता है भारी नुकसान
शुरुआती दिनों में खरपतवार गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। ये पानी, खाद और जगह के लिए फसल से मुकाबला करते हैं, जिससे पैदावार घट जाती है। इसलिए समय पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।
प्री-इमर्जेंस दवा क्यों है जरूरी
खरपतवार रोकने के लिए प्री-इमर्जेंस तरीका काफी कारगर माना जाता है। इसमें फसल उगने से पहले ही खरपतवार को पनपने से रोक दिया जाता है। गेहूं के लिए पेनिडमेथिलिन दवा इसका अच्छा विकल्प है।
पेनिडमेथिलिन का सही इस्तेमाल
बुआई के 5 दिन के अंदर पेनिडमेथिलिन का छिड़काव करें। करीब सवा लीटर दवा प्रति एकड़ पानी में घोलकर समान रूप से खेत में छिड़कें। ध्यान रखें कि खेत में नमी हो।
दवा का छिड़काव हल्की हवा में करें और तय मात्रा से ज्यादा इस्तेमाल न करें। सही खाद प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण से गेहूं की फसल स्वस्थ रहती है, पैदावार बढ़ती है और किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है।