छत्तीसगढ़ के किसान इन दिनों बढ़ती खेती की लागत और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता से काफी परेशान हैं। यूरिया, डीएपी और अन्य रसायनिक खाद के लगातार इस्तेमाल से लागत बढ़ती जा रही है और मिट्टी की उर्वरता भी कम हो रही है। ऐसे में कुछ किसानों ने एक नया मॉडल अपनाया है, जिसमें खेती और मुर्गी पालन को जोड़ा गया है। इस तरीके में मुर्गियों के बीट से तैयार होने वाला जैविक खाद खेतों में इस्तेमाल किया जाता है। मुर्गियों का मल-मूत्र भूंसी के साथ मिलकर कुछ समय में पोषक तत्वों से भरपूर खाद बन जाता है,
