गेंदा फूल की खेती किसानों के लिए हमेशा से कम लागत और ज्यादा मुनाफे का अच्छा जरिया रही है। वैसे तो गेंदा की मांग पूरे साल बनी रहती है, लेकिन दिसंबर का महीना इसमें खास भूमिका निभाता है। इस दौरान शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे फूलों की खपत अचानक कई गुना हो जाती है। बाजार में मांग बढ़ने के साथ-साथ गेंदा के फूलों की कीमतों में भी अच्छा उछाल देखने को मिलता है। अगर किसान इस मौके को समझदारी से भुनाएं और दिसंबर महीने में गेंदा की उन्नत किस्मों की रोपाई करें,
तो उन्हें आने वाले महीनों में बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी मिल सकती है। सही किस्म, समय पर रोपाई और सामान्य देखभाल के साथ गेंदा की खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
सही समय पर रोपाई से बढ़ेगी कमाई
छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. कमलेश अहिरवार लोकल 18 से बात करते हुए ये बताते हैं कि दिसंबर में रोपाई करने पर गेंदा के पौधे फरवरी-मार्च से लगातार फूल देने लगते हैं। यही वो समय होता है जब बाजार में गेंदा की सबसे ज्यादा खपत होती है। सही तकनीक अपनाने से कम लागत में ज्यादा उत्पादन संभव है।
कौन-सी किस्में रहेंगी बेहतर
नवंबर-दिसंबर में अफ्रीकन मैरीगोल्ड और फ्रेंच मैरीगोल्ड की खेती सबसे उपयुक्त मानी जाती है। ‘पनाम गोल्ड’, ‘अफ्रीकन ऑरेंज’, ‘सुपर येलो’ और ‘सरवानी’ जैसी किस्में तेजी से बढ़ती हैं, बड़े फूल देती हैं और लंबे समय तक ताजा रहती हैं।
रोपाई और दूरी का रखें ध्यान
किसानों को सलाह दी जाती है कि 25–30 दिन की पौध नर्सरी में तैयार कर खेत में लगाएं। पौधों के बीच 40–45 सेंटीमीटर की दूरी रखने से फूलों का विकास बेहतर होता है।
बाजार में गेंदा की जबरदस्त कीमत
गेंदा की सबसे बड़ी ताकत इसकी बाजार मांग है। लगन और त्योहारों के समय इसके फूलों के दाम दोगुने तक हो जाते हैं। सही तरीके से खेती करने पर किसान प्रति एकड़ 60 से 80 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
तुड़ाई और बिक्री के आसान तरीके
फूलों की तुड़ाई सुबह या शाम के समय करने से उनकी गुणवत्ता बनी रहती है। ताजे फूल मंडी में जल्दी बिक जाते हैं। कई किसान गेंदा की माला बनाकर घर बैठे अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।
सिंचाई और देखभाल है बेहद आसान
गेंदा की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। चार-पांच दिन में हल्की सिंचाई काफी होती है। फूल आने के समय नमी बनाए रखना जरूरी है।
रोग से बचाव के घरेलू उपाय
फसल को रोगों से बचाने के लिए नीम आधारित जैविक स्प्रे और समय-समय पर हल्की गुड़ाई काफी असरदार मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में गेंदा की उन्नत किस्म लगाने से आने वाले महीनों में किसानों को जबरदस्त फायदा मिलता है।