Okra Cultivation: नौकरी नहीं मिली तो उठाया ये कदम, 70 दिन में बदल गई किस्मत!

Okra Cultivation: गोंडा के किसान दीप नारायण मौर्य ने नौकरी में असफलता के बाद भिंडी की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। VNR VBH 11 और राधिका किस्मों से उन्हें 60–70 दिनों में उत्पादन मिल रहा है। बेड विधि से कम लागत में खेती कर वे अब अच्छे मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं

अपडेटेड Mar 28, 2026 पर 12:47 PM
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Okra Cultivation: इस बार उनकी भिंडी की फसल अच्छी स्थिति में है और अगर बाजार भाव अनुकूल रहा

के दौर में जब अधिकतर युवा सरकारी और प्राइवेट नौकरी की होड़ में लगे हुए हैं, तब कुछ लोग अलग सोच के साथ अपनी राह खुद बनाते नजर आते हैं। गोंडा जिले के दीप नारायण मौर्य भी उन्हीं में से एक हैं, जिन्होंने पारंपरिक सोच से हटकर कुछ नया करने का साहस दिखाया। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने भी नौकरी पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बार-बार असफलता मिलने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी दिशा बदलने का फैसला किया।

परिस्थितियां आसान नहीं थीं, जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही थीं, लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और गांव लौटकर कुछ अलग करने की ठानी। यही सोच उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी, जहां से उन्होंने संघर्ष को अवसर में बदलने की शुरुआत की।

मजबूरी बनी नई शुरुआत का कारण

बाहर काम करने के बाद जब पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें गांव लौटना पड़ा, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रोज़गार की थी। सीमित संसाधन और कम अनुभव के बावजूद उन्होंने खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निश्चय किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने सीखने और आगे बढ़ने का हौसला नहीं छोड़ा।


पारंपरिक खेती से हटकर अपनाया नया तरीका

दीप नारायण ने पहले पारंपरिक खेती की, लेकिन इसमें ज्यादा लागत और कम मुनाफा देखकर उन्होंने दिशा बदलने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें एक संस्थान से आधुनिक सब्जी खेती की जानकारी मिली, जिसने उनकी सोच बदल दी। इसके बाद उन्होंने भिंडी की उन्नत किस्मों—VNR VBH 11 और राधिका—की खेती शुरू की, जो स्थानीय मौसम में बेहतर उत्पादन देती हैं।

60 दिन में मिलने लगी फसल

उनकी मेहनत का असर जल्द ही दिखने लगा। भिंडी की फसल करीब 60–65 दिनों में तैयार होकर फल देना शुरू कर देती है और लगभग 70 दिन में कटाई भी शुरू हो जाती है। इससे उन्हें जल्दी आय का मौका मिलता है, जो छोटे किसानों के लिए काफी फायदेमंद है।

बेड विधि से कम लागत, ज्यादा फायदा

दीप नारायण बेड विधि से खेती कर रहे हैं, जिसमें पानी की बचत होती है और खरपतवार भी कम उगते हैं। इस तकनीक में उन्होंने बेड की दूरी करीब 2 फीट और पौधों के बीच 8–10 इंच का अंतर रखा है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।

अब खेती से दिख रही कमाई की उम्मीद

इस बार उनकी भिंडी की फसल अच्छी स्थिति में है और अगर बाजार भाव अनुकूल रहा, तो उन्हें शानदार मुनाफा मिलने की उम्मीद है। उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो नौकरी के पीछे भागने के बजाय खेती में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं।

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