सर्दियों का मौसम किसानों के लिए अवसर और चुनौतियों दोनों लेकर आता है। अगर किसान थोड़ी समझदारी और सही योजना के साथ फसल का चुनाव करें, तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है। इसीलिए कृषि और उद्यानिकी विभाग लगातार किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उन्नत तकनीक और नकदी फसल अपनाने की सलाह दे रहा है। इस समय भिंडी की खेती किसानों के लिए खासतौर पर लाभकारी साबित हो रही है। ठंड के मौसम में भिंडी की पैदावार बेहतर होती है और बाजार में इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं। हाइब्रिड बीज का इस्तेमाल करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है, जिससे किसान को ज्यादा मुनाफा मिलता है।
साथ ही नियमित तुड़ाई और सही बुवाई समय का पालन करने से फसल का नुकसान कम होता है और निरंतर आमदनी सुनिश्चित होती है। यही वजह है कि सर्दियों में भिंडी की खेती अब किसानों के लिए एक फायदेमंद विकल्प बन गई है।
ठंड में खेती से मिलेगा अच्छा उत्पादन
उद्यानिकी विभाग के प्रक्षेत्र सलाहकार विमल कुमार साहू लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि ठंड के मौसम में भिंडी की खेती करने से पैदावार अच्छी होती है और बाजार में दाम भी बढ़िया मिलते हैं। मांग ज्यादा होने की वजह से किसान अपनी फसल आसानी से बेच सकते हैं और नियमित तुड़ाई से लगातार आमदनी बनी रहती है।
हाइब्रिड बीज से ज्यादा मुनाफा
किसानों को अब हाइब्रिड भिंडी बीज ही चुनना चाहिए। हाइब्रिड बीज से पैदावार ज्यादा मिलती है और फल की गुणवत्ता भी बाजार के हिसाब से बेहतरीन रहती है। भिंडी की उन्नत किस्मों में ‘राधिका’ सबसे फायदेमंद मानी जाती है। इसमें फल लंबे, मुलायम और आकर्षक होते हैं, जिससे मंडी में अच्छे दाम मिलते हैं।
सब्सिडी और जरूरी दस्तावेज
भिंडी की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग सब्सिडी का लाभ भी दे रहा है। एक एकड़ में भिंडी लगाने पर किसान 24 हजार रुपये तक का अनुदान ले सकते हैं। इसके लिए बीज विभाग से रजिस्टर्ड कृषि सेवा केंद्र से खरीदा जाना चाहिए। सब्सिडी लेने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ऋण पुस्तिका और बैंक पासबुक की छायाप्रति जमा करनी होती है। अधिकारी खेत का निरीक्षण कर फोटो रिपोर्ट जिला कार्यालय भेजते हैं और जांच के बाद अनुदान सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
लागत, मुनाफा और तुड़ाई का ध्यान
प्रति हेक्टेयर भिंडी की खेती में लगभग 70 हजार रुपये की लागत आती है, जिसमें से 24 हजार रुपये तक सरकार की मदद मिलती है। ढाई एकड़ में करीब 400 क्विंटल उत्पादन संभव है, जबकि एक एकड़ से 100 क्विंटल उपज मिल सकती है। भिंडी की तुड़ाई हर दूसरे दिन जरूरी है। 3–4 दिन तक तुड़ाई न करने पर फल सख्त हो जाते हैं और बाजार भाव गिर जाता है। कृषि एक्सपर्ट का सुझाव है कि ठंड के कारण बुवाई 15 दिन बाद करें, ताकि अंकुरण अच्छा हो और फसल की शुरुआत मजबूत हो।