आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। इसकी मांग देश-विदेश तक रहती है और किसान भी इससे अच्छी कमाई की उम्मीद रखते हैं। लेकिन अच्छी पैदावार किस्मत से नहीं, सही समय पर की गई देखभाल से मिलती है। खेती में सबसे अहम चीज होती है सही टाइमिंग। खासकर फरवरी और मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी दौरान पेड़ों पर बौर निकलता है और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर इस चरण में पानी, खाद या देखभाल में जरा सी चूक हो जाए तो फूल झड़ सकते हैं और फल कम लगते हैं।
इसलिए इस समय सावधानी और समझदारी से काम लेना जरूरी है। सही प्रबंधन अपनाया जाए तो न सिर्फ नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि पैदावार में अच्छा इजाफा भी किया जा सकता है।
पानी में गड़बड़ी तो बौर गड़बड़
जब फरवरी में पेड़ों पर बौर निकल रहे हों, उस समय ज्यादा पानी बिल्कुल न दें। ज्यादा सिंचाई से नई पत्तियां फूटने लगती हैं और फूल कमजोर पड़ जाते हैं।
जब मटर के दाने जितने छोटे फल दिखने लगें, तब हल्की सिंचाई शुरू करें। मार्च में फल बढ़ने के समय नियमित लेकिन सीमित पानी दें। ड्रिप सिंचाई सबसे बढ़िया तरीका माना जाता है, इससे जड़ों तक सही नमी पहुंचती है और पानी की बचत भी होती है।
खाद-पानी का सही जोड़ ही देगा जोर
इस मौसम में संतुलित खाद जरूरी है। गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना फायदेमंद रहता है।
बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें।
पोटाश युक्त खाद जैसे NPK 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें। इससे एक मंजर से 8–10 आम तक लग सकते हैं। फरवरी में हल्की खाद देने से बौर मजबूत रहता है और फूल कम झड़ते हैं।
इस समय मधुआ, गुझिया और हॉपर जैसे कीट फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं। झुलसा (एंथ्रेक्नोज) रोग भी बड़ी समस्या है।
फरवरी में ही पहला और दूसरा स्प्रे कर लें। जरूरत हो तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का इस्तेमाल करें, लेकिन फूल के समय सावधानी जरूर बरतें।
पेड़ के नीचे सूखी घास या प्लास्टिक से मल्चिंग करें, इससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
अगर टहनियां ज्यादा घनी हों तो सूखी या बीमार शाखाएं काट दें। इससे धूप और हवा अंदर तक पहुंचेगी और फल अच्छे लगेंगे। लेकिन ध्यान रहे, इस समय भारी छंटाई न करें क्योंकि पेड़ फूल के दौर में होता है।