Sugarcane Farming Tips: गन्ने की मिठास ने बदली तस्वीर, पलामू के किसान कमा रहे डेढ़ गुना फायदा

Sugarcane Farming Tips: पलामू जिले का सगालिम गांव लंबे समय से गन्ने की खेती की पहचान बना हुआ है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु गन्ने के लिए बेहद मुफीद मानी जाती है। यही वजह है कि पीढ़ियों से किसान इस फसल को उगाते आ रहे हैं और आज सगालिम गन्ना उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बन चुका है

अपडेटेड Jan 31, 2026 पर 12:52 PM
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Sugarcane Farming: सगालिम में तैयार किया गया गुड़ सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है।

झारखंड के पलामू जिले का सगालिम गांव वर्षों से गन्ने की खेती के लिए खास पहचान रखता है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु गन्ने की फसल के लिए बेहद मुफीद मानी जाती है। इसी वजह से इस गांव में पीढ़ी दर पीढ़ी किसान गन्ने की खेती करते आ रहे हैं और इसे अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाए हुए हैं। समय के साथ सगालिम गांव गन्ना उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां हर साल बड़ी मात्रा में गन्ने की खेती होती है। गांव के खेतों में लहलहाती गन्ने की फसल यहां की मेहनत और अनुभव का प्रमाण है। स्थानीय किसान पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ अपने अनुभव का उपयोग कर अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं।

गन्ने के साथ यहां गुड़ उत्पादन भी बड़े स्तर पर किया जाता है, जिसकी मांग आसपास के इलाकों के साथ-साथ दूर-दराज के बाजारों में भी बढ़ रही है। यही वजह है कि सगालिम गांव आज पूरे क्षेत्र में गन्ने की खेती का मजबूत उदाहरण बन चुका है।

पीढ़ियों से गन्ने पर निर्भर हैं किसान


सगालिम गांव के किसान परमेंद्र कुमार पिछले कई वर्षों से गन्ने की खेती कर रहे हैं। वे करीब 5 एकड़ जमीन में गन्ना उगाते हैं। उनका कहना है कि गांव में गन्ना ही मुख्य फसल है और अधिकतर परिवार इसी खेती पर निर्भर हैं। यहां आधुनिक तकनीक और पारंपरिक अनुभव का अच्छा तालमेल देखने को मिलता है, जिससे किसान लागत से डेढ़ गुना तक मुनाफा कमा रहे हैं।

क्यों कहलाता है सगालिम गन्ने की खेती का हब

परमेंद्र कुमार बताते हैं कि आसपास के क्षेत्रों की तुलना में सगालिम में सबसे ज्यादा गन्ने की पैदावार होती है। हर साल बड़ी संख्या में खेतों में गन्ने की बुवाई की जाती है। इसी वजह से इस गांव ने पूरे क्षेत्र में गन्ने की खेती को लेकर अपनी अलग पहचान बना ली है।

छठ पूजा में बढ़ जाती है गुड़ की मांग

छठ पूजा के समय सगालिम गांव के गन्ने और गुड़ की मांग सबसे ज्यादा रहती है। पिछले साल छठ के दौरान यहां से करीब 50 से 60 टन गुड़ की बिक्री हुई थी। त्योहारों में शुद्ध और स्वादिष्ट गुड़ की मांग बढ़ने से किसानों को अच्छी आमदनी होती है।

दिल्ली तक पहुंच रहा गांव का गुड़

सगालिम में तैयार किया गया गुड़ सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है। व्यापारी इसे दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक भेजते हैं। यहां के गुड़ का स्वाद प्राकृतिक और अलग माना जाता है, जिसकी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

लागत कम, मुनाफा ज्यादा

किसान परमेंद्र कुमार के अनुसार, गन्ने की खेती में प्रति एकड़ लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है। अगर फसल की सही देखभाल हो और बाजार अच्छा मिले, तो एक एकड़ से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई संभव है।

कलम से होती है गन्ने की बुवाई

सगालिम गांव में गन्ने की बुवाई कलम विधि से की जाती है। कलम को बहुत सावधानी से खेत में लगाया जाता है ताकि पौधों की बढ़वार अच्छी हो और उत्पादन ज्यादा मिले। किसानों का अनुभव इस प्रक्रिया को सफल बनाता है।

सरकारी सहयोग से बढ़ सकती हैं संभावनाएं

स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर सरकार की ओर से सही प्रोत्साहन, तकनीकी मदद और बेहतर बाजार सुविधाएं मिलें, तो सगालिम गांव न सिर्फ राज्य बल्कि देशभर में गन्ने की खेती का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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