शहरों और कस्बों में खुले कचरे के बीच भटकते पशु अब गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। किचन वेस्ट के साथ फेंकी जा रही पॉलीथिन और प्लास्टिक उनके लिए जानलेवा साबित हो रही है। पशुपालकों के लिए ये चिंता का विषय है कि अगर उनका पशु गलती से पॉलीथिन निगल ले, तो इसके संकेत क्या होंगे और उन्हें कैसे बचाया जा सकता है। मध्य प्रदेश के सतना जिला पशुचिकित्सालय के प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि, शहरी इलाकों में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।
लोग किचन कचरे को पॉलीथिन में डालकर खुले में फेंकते हैं और पशु इसे भोजन समझकर निगल जाते हैं। इसके कारण पेट में गैस, अफरा और गंभीर मामलों में ऑपरेशन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
पॉलीथिन खाने की वजह और समस्या
मध्य प्रदेश के सतना जिला पशुचिकित्सालय के प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है। लोग किचन कचरे को पॉलीथिन में बांधकर खुले में फेंकते हैं, और पशु इसे भोजन समझकर निगल जाते हैं। सब्जियों के छिलके के साथ पन्नी और प्लास्टिक भी पेट में जमा हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य खतरे में पड़ता है।
पाइका बीमारी भी बढ़ा सकती है खतरा
पॉलीथिन खाने के पीछे एक वजह पाइका बीमारी भी है। इस बीमारी में पशु के शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस का संतुलन बिगड़ जाता है, खासकर फास्फोरस की कमी के कारण पशु असामान्य चीजें खाने लगता है। ये आदत आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
जुगाली करने वाले पशु सबसे अधिक प्रभावित
ये समस्या मुख्य रूप से जुगाली करने वाले पशु जैसे गाय, भैंस, बकरी और भेड़ में देखी जाती है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित गाय होती है, क्योंकि उसे अक्सर खुले में छोड़ दिया जाता है। पॉलीथिन पेट में जमा होकर न तो गलती है और न ही बाहर निकल पाती है।
डॉ. भारती बताते हैं कि पॉलीथिन खाने का पहला संकेत पेट में लगातार गैस बनना और अफरा है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो ऑपरेशन करना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में टीरपी बीमारी भी हो सकती है, जिसमें जान का खतरा रहता है।
पॉलीथिन खाने वाले पशु में यह संकेत दिखाई देते हैं:
पशुओं को नियमित डेवर्मिंग और खनिज मिश्रण दें
फास्फोरस की कमी न होने दें
पशुओं को कचरे वाले इलाकों में न छोड़ें
पर्याप्त रेशेदार चारा उपलब्ध कराएं
समाज में किचन वेस्ट को खुले में पॉलीथिन में न फेंकें