सौराष्ट्र और पूरे गुजरात में किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अमरूद, सीताफल, आम, नारियल जैसी बागवानी फसलें उगा रहे हैं। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि ये स्वस्थ जीवन और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। बागवानी की फसलों की कम देखभाल की जरूरत होती है। इन्हें अन्य फसलों के साथ भी उगाया जा सकता है, जिससे खेत की उपज बढ़ती है और किसान की आय में सुधार होता है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से रासायनिक उर्वरक और दवाओं का उपयोग कम हो जाता है, जिससे मिट्टी और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहते हैं।
