विंध्य क्षेत्र में इस समय किसान एक गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। खेतों में चूहों की बढ़ती गतिविधि ने गेहूं की फसल पर खतरा खड़ा कर दिया है। चूहे जमीन के अंदर बिल बनाकर पौधों की जड़ों को कुतर रहे हैं और बालियों को काटकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ रहा है। कई इलाकों में 25 से 30 प्रतिशत तक पैदावार घटने की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। सीधी के कृषि अधिकारी संजय सिंह का कहना है कि जैसे ही गेहूं में बालियां निकलती हैं, चूहे अधिक सक्रिय हो जाते हैं और तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं। यदि समय रहते नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। ऐसे में सतर्कता और त्वरित कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।
ऐसे पहचानें चूहों की मौजूदगी
कृषि विभाग के मुताबिक, खेत में ताजी खुदी मिट्टी, बिलों के पास कटी पत्तियां और जड़ों के आसपास काली बीट दिखाई दे तो समझ लें कि चूहे सक्रिय हैं। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
अपनाएं देसी और किफायती उपाय
किसानों को लाल मिर्च पाउडर, लहसुन पेस्ट, नीम तेल और पुदीना मिलाकर घोल बनाकर मेड़ों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। तेज गंध से चूहे दूर रहते हैं। बिलों में फिनायल की गोली रखने से भी राहत मिलती है।
निगरानी और सिंचाई है जरूरी
सुबह-शाम खेत का निरीक्षण करने से चूहों की गतिविधि कम होती है। नियमित सिंचाई से बिलों में पानी भर जाता है, जिससे उनका ठिकाना नष्ट हो जाता है।
जरूरत पर करें रासायनिक उपाय
अधिक नुकसान की स्थिति में जिंक फास्फाइड, रेजेंट दानेदार या अन्य दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है।