सर्दियों के बाद जैसे-जैसे गर्मी का मौसम शुरू होता है, वैसे ही खेतों में फसलों का काम भी तेज हो जाता है। कई किसान आलू की खुदाई के बाद प्याज की रोपाई करते हैं और कुछ जगहों पर पौधे तेजी से बढ़ने भी लगते हैं। प्याज की बेहतर पैदावार के लिए किसान लंबे समय से कई पारंपरिक तरीके अपनाते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक तरीका है प्याज के पौधों को हल्का कुचल देना। पहले यह केवल अनुभव के आधार पर किया जाता था, लेकिन अब इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी सामने आ चुके हैं।
क्यों कुचलते हैं प्याज के पौधे?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब प्याज का पौधा पूरी तरह विकसित होने लगता है और कंद (बल्ब) पकने की अवस्था में होता है, तब किसान पौधे की गर्दन यानी कंठ के ऊपर वाले हिस्से को हल्का दबा देते हैं। कई बार किसान इसे काट भी देते हैं, लेकिन पारंपरिक तरीके में पैरों से हल्का कुचलना ज्यादा आम माना जाता है।
यह प्रक्रिया पौधे की ऊपरी बढ़त को रोक देती है, जिससे पौधे की ऊर्जा सीधे कंद यानी प्याज के बल्ब के विकास में लगने लगती है।
इससे प्याज को क्या फायदा होता है?
जब पौधे का ऊपरी हिस्सा कुचल दिया जाता है, तो प्याज का कंद तेजी से विकसित होने लगता है। इससे प्याज का आकार बड़ा हो सकता है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा प्याज के ऊपर बनने वाली पतली झिल्ली भी मजबूत बनती है, जिससे प्याज जल्दी खराब नहीं होती। यही वजह है कि कई किसान इस तरीके को आज भी अपनाते हैं।
सही समय पर ही करें यह काम
प्याज के पौधों को कुचलने का तरीका तभी अपनाना चाहिए जब पौधे पूरी तरह विकसित हो चुके हों और प्याज पकने के करीब हो। अगर यह काम बहुत जल्दी कर दिया जाए, तो पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
सिंचाई के समय मिल सकता है ज्यादा फायदा
किसानों के अनुभव के अनुसार, अगर खेत में सिंचाई के दौरान या उसके आसपास इस प्रक्रिया को किया जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इससे पौधे जल्दी सूखते नहीं हैं और प्याज अच्छी तरह पकने में मदद मिल सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि पहले किसान इस तरीके को केवल अनुभव के आधार पर अपनाते थे। लेकिन अब कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सही समय पर यह प्रक्रिया करने से प्याज के कंद के विकास में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि यह पारंपरिक तरीका आज भी खेती में उपयोगी माना जाता है।