मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के सिरपुर गांव के किसान बाबू खा ने अपनी मेहनत और सोच के दम पर खेती में एक नई मिसाल कायम की है। परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाई, जिसने उनकी आमदनी में इजाफा किया और साथ ही गांव के कई लोगों को रोजगार का अवसर भी दिया। पहले उनके परिवार में केले, गन्ने और कपास जैसी पारंपरिक फसलें उगाई जाती थीं, लेकिन इनकी लागत अधिक और मुनाफा सीमित था। बाबू खा ने यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से नए खेती के तरीकों को सीखा और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर 10 साल पहले केमिकल खेती छोड़ दी।
उन्होंने प्राकृतिक तरीके से सब्जियों, तुवर, सोयाबीन और मक्का की खेती शुरू की, जिससे उत्पादन बढ़ा और फसलों के दाम भी बेहतर मिलने लगे। उनके अनुभव ने सिर्फ उनकी जिंदगी नहीं बदली, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई।
परंपरागत खेती से नई शुरुआत
बाबू खा बताते हैं कि उनके परिवार में पहले केला, गन्ना और कपास की खेती होती थी। इन फसलों में लागत ज्यादा और मुनाफा कम था। उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया से खेती के नए तरीके सीखे और कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर 10 साल पहले केमिकल खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती शुरू की।
उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी
प्राकृतिक तरीके से खेती शुरू करने के बाद उनका उत्पादन बढ़ा और फसलों के दाम भी अच्छे मिलने लगे। अब बाबू खा लगभग 5 एकड़ जमीन में तुवर, सोयाबीन, मक्का और खासकर सब्जियों की खेती करते हैं। सब्जियों से रोजाना नकद आमदनी होने की वजह से खेती में दोबारा निवेश करना आसान हो गया।
गोबर से घर पर तैयार जैविक खाद
बाबू खा अपने पशुओं के गोबर से घर पर ही खाद तैयार करते हैं। यह पूरी तरह जैविक होती है, जिससे मिट्टी की सेहत और फसल की गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं। प्राकृतिक खेती में लागत कम और फायदा ज्यादा होता है।
बाबू खा अपने अनुभव और जानकारी दूसरे किसानों के साथ मुफ्त साझा करते हैं। उनके खेत में 10 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है।
बाबू खा कहते हैं कि आज के समय में अगर किसान सीखने के लिए तैयार हों, तो यूट्यूब और सोशल मीडिया बहुत बड़ा सहारा बन सकते हैं। मेहनत, सही जानकारी और धैर्य के साथ खेती की जाए, तो किसान भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।