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Budget 2025-26: CII का फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का सुझाव, डिमांड बढ़ाने के लिए कंजप्शन वाउचर की सलाह

CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि घरेलू खपत भारत की ग्रोथ स्टोरी के लिए अहम रही है, लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव ने कंज्यूमर्स की क्रय शक्ति को कुछ हद तक कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी हस्तक्षेप के जरिये खर्च करने योग्य आय को बढ़ाने और आर्थिक गति को बनाए रखने पर फोकस किया जा सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 29, 2024 पर 9:28 PM
Budget 2025-26: CII का फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का सुझाव, डिमांड बढ़ाने के लिए कंजप्शन वाउचर की सलाह
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट के लिए अपने सुझावों में फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का सुझाव दिया है।

Budget 2025-26: इंडस्ट्री बॉडी कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट के लिए अपने सुझावों में फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का सुझाव दिया है। CII ने कहा कि कंजप्शन बढ़ाने के लिए खासकर लोअर इनकम लेवल पर यह छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि फ्यूल की कीमतें मुद्रास्फीति (Inflation) को काफी बढ़ाती हैं। CII ने कहा कि बजट में 20 लाख रुपये प्रति वर्ष तक की पर्सनल इनकम के लिए मार्जिनल टैक्स रेट को कम करने पर भी विचार किया जा सकता है। इससे कंजप्शन, हायर ग्रोथ और हायर टैक्स रेवेन्यू के सायकल को गति देने में मदद मिलेगी।

CII ने दिए ये सुझाव

सुझावों में यह भी कहा गया कि व्यक्तियों के लिए हाईएस्ट मार्जिनल रेट 42.74 फीसदी और नॉर्मल कॉरपोरेट टैक्स रेट 25.17 फीसदी के बीच का अंतर अधिक है। ऐसे में मुद्रास्फीति ने लोअर और मिडिल इनकम वालों की क्रय शक्ति को कम कर दिया है। इंडस्ट्री बॉडी ने कहा, "सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल के खुदरा मूल्य का लगभग 21 फीसदी और डीजल के लिए 18 फीसदी है। मई 2022 से इन शुल्कों को ग्लोबल क्रूड प्राइस में लगभग 40 फीसदी की कमी के अनुसार एडजस्ट नहीं किया गया है। फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने से ओवरऑल इनफ्लेशन को कम करने और खर्च करने योग्य आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।’’

CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि घरेलू खपत भारत की ग्रोथ स्टोरी के लिए अहम रही है, लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव ने कंज्यूमर्स की क्रय शक्ति को कुछ हद तक कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी हस्तक्षेप के जरिये खर्च करने योग्य आय को बढ़ाने और आर्थिक गति को बनाए रखने पर फोकस किया जा सकता है।

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