Budget 2025: कैपेक्स और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर पर फोकस्ड हो आम बजट, MPC मेंबर नागेश कुमार ने दिए ये सुझाव

Budget 2025: सीतारमण ने अपने पिछले साल के बजट में कहा था कि सरकार 2024-25 के लिए कैपेक्स के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) शुरू करेगी

अपडेटेड Jan 19, 2025 पर 3:44 PM
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Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को 2025-26 का आम बजट पेश करेंगी।

Budget 2025-26: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आम बजट 2025-26 में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और इसे अधिक सस्टेनेबल बनाने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर स्पेंडिंग पर फोकस करना चाहिए। यह सुझाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्य नागेश कुमार ने आज रविवार दिया। अर्थशास्त्री ने कहा कि इन्फ्रॉस्ट्रक्चर पर खर्च को बनाए रखना और इसे और आगे बढ़ाना भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार को कायम रखने में मदद करेगा।

Budget 2025  पर कुमार ने दिए ये सुझाव

कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में कहा, "दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में मामूली सुस्ती देखने को मिली है। कुल मिलाकर हमें ग्रोथ को बढ़ावा देने, इसे अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री को इस मोमेंटम (बजट 2025-26 में) को जारी रखना चाहिए, जिसे उन्होंने खुद दो साल पहले शुरू किया था। इसमें कैपेक्स, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर पर खर्च और इसे बहुत हेल्दी लेवल तक बढ़ाने पर बहुत जोर दिया गया था।"


कोविड महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पहुंचाया नुकसान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को 2025-26 का आम बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे समय आ रहा है जबकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ चुकी हैं और घरेलू वृद्धि दर सुस्त पड़ी है। कुमार ने कहा, "कोविड महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ। उसके बाद इसने एक मजबूत सुधार देखा। लेकिन पिछले कुछ साल से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाली यह दबी मांग अब समाप्त हो रही है।" उन्होंने कहा कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे मोड़ पर है, जो कोविड-पूर्व समय में था। इसे अब सार्वजनिक खर्च के जरिये आगे बढ़ाने की जरूरत है।

सीतारमण ने अपने पिछले साल के बजट में कहा था कि सरकार 2024-25 के लिए कैपेक्स के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) शुरू करेगी। भारत की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) की GDP ग्रोथ रेट सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई है।

रुपये की कमजोरी पर कुमार ने क्या कहा?

रुपये के कमजोर होने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कुमार ने कहा कि यह रुपये में गिरावट से ज्यादा डॉलर की मजबूती है। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले सभी मुद्राएं कमजोर हो रही हैं, क्योंकि डॉलर बहुत मजबूत हो रहा है, और यह काफी हद तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और इस उम्मीद के कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला नया प्रशासन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ करेगा।

कुमार ने कहा, "इसलिए रुपये की यह कमजोरी काफी हद तक डॉलर की मजबूती है और इसके चलते फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) भी भारत से अपना निवेश निकाल रहे हैं। जब डॉलर की बहुत अधिक मांग होगी, तो रुपया कमजोर होगा।" उन्होंने कहा कि हमें यह तथ्य भी देखना चाहिए कि अन्य मुद्राएं भी कमजोर हो रही हैं। कुमार ने कहा, "मेरा मानना ​​है कि रुपया अब भी वास्तविक रूप से थोड़ा मजबूत है और इसका मूल्य कुछ अधिक है। उन्होंने कहा कि रुपये को अधिक कंपटीटिव एक्सचेंज रेट पर रखना एक्सपोर्ट के नजरिए से अच्छा है।" डॉलर के मुकाबले रुपया फिलहाल 86.60 के आसपास रहा है। 13 जनवरी को यह 86.70 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर भी आ गया था।

जनता को मुफ्त चीजें देने पर कुमार की राय

कई राज्य सरकारों द्वारा जनता को मुफ्त में चीजें देने के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि यह लॉन्ग टर्म की ग्रोथ की दृष्टि से चिंता की बात है। उन्होंने कहा, "क्योंकि जिन संसाधनों का इस्तेमाल विकास के लिए, बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए हो सकता है, वे मुफ्त योजनाओं में खर्च हो रहे हैं।" उन्होंने कहा कि यह कोई अच्छी चीज नहीं है और इसपर रोक लगनी चाहिए।

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