Budget 2025: डिफेंस इक्विपमेंट के घरेलू उत्पादन पर होगा सीतारमण का फोकस

सरकार का FY25 में डिफेंस पर पूंजीगत खर्च 1.72 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। यह एक साल पहले 1.57 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के मुकाबले 9.4 फीसदी ज्यादा है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद के 11 साल में डिफेंस पर पूंजीगत खर्च दोगुना हो गया है

अपडेटेड Jan 07, 2025 पर 6:29 PM
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2023 में डिफेंस पर खर्च के मामले में इंडिया दुनिया में तीसरे पायदान पर था।

यूनियन बजट 2025 पेश होने की तारीख नजदीक आ रही है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में हर मंत्रालय के लिए पैसे का ऐलोकेशन करेंगी। अनुमान है कि वह डिफेंस मिनिस्ट्री के आवंटन को बढ़ाएंगी। सरकार हर साल डिफेंस मिनिस्ट्री के लिए आवंटन बढ़ाती आ रही है। डिफेंस पर सरकार का पूंजीगत खर्च भी लगातार बढ़ता रहा है। वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2025 के बीच डिफेंस पर सरकार के पूंजीगत खर्च की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 9.1 फीसदी रहा है। यह फाइनेंशियल ईयर 2015 से फाइनेंशियल ईयर 2020 के बीच 6 फीसदी सीएजीआर के मुकाबले काफी ज्यादा है।

पूंजीगत खर्च 1.72 लाख करोड़ रहने की उम्मीद

सरकार का FY25 में डिफेंस पर पूंजीगत खर्च 1.72 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। यह एक साल पहले 1.57 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के मुकाबले 9.4 फीसदी ज्यादा है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद के 11 साल में डिफेंस पर पूंजीगत खर्च दोगुना हो गया है। सरकार के डिफेंस पर कुल खर्च में पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी इस वित्त वर्ष में 27.7 फीसदी के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई। एक साल पहले यह हिस्सेदारी 25.2 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2024 के बीच डिफेंस पर सरकार के कुल खर्च में पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी औसत 25.4 फीसदी थी।


जीडीपी में डिफेंस पर पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी घटी

हालांकि, कोविड की महामारी के बाद से जीडीपी में डिफेंस पर होने वाले पूंजीगत खर्च की हिस्सेदारी में कमी आई है। 2020-21 तक जीडीपी में डिफेंस पर होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 2.3 फीसदी थी। लेकिन, 2021-22 और 2024-25 के बीच यह घटकर 2.1 फीसदी पर आ गई। वित्त वर्ष 2024-25 में डिफेंस पर होने वाले खर्च की हिस्सेदारी घटकर 2 फीसदी से नीचे चली गई। एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार ऐसा हुआ। हालांकि, डिफेंस पर सरकार का फोकस लगातार बना हुआ है।

रक्षा उपकरणों का उत्पादन देश में करने पर फोकस

सरकार ने देश में ही डिफेंस इक्विपमेंट का उत्पादन बढ़ाने पर फोकस बढ़ाया है। FY29 तक सरकार ने डिफेंस उत्पादन के लिए टारगेट बढ़ाकर तिगुना यानी 3 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार ने डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए 50,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। 2023 में डिफेंस पर खर्च के लिहाज से इंडिया दुनिया में तीसरे पायदान पर रहा। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा से यह जानकारी मिली है। हालांकि, इंडिया का डिफेंस पर कुल खर्च अमेरिका का सिर्फ 10 फीसदी है। चीन के मुकाबले यह सिर्फ एक चौथाई है।

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आयात पर निर्भरता घटाने पर रहेगा जोर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार यूनियन बजट 2025 में डिफेंस के लिए आवंटन में अच्छा इजाफा कर सकती है। इसमें पूंजीगत खर्च की बड़ी हिस्सेदारी होगी। केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का फोकस देश में ही डिफेंस इक्विपमेंट का उत्पादन करने पर बना रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे आयात पर निर्भरता घटेगी।

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