बजट 2025 से पहले इकोनॉमी की ग्रोथ पर चर्चा करने का यह सही समय है। आखिर जीडीपी ग्रोथ फिर से कैसे 7-8 फीसदी होगी? 24 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इकोनॉमिस्ट्स के साथ हुई बैठक में इस सवाल पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में तेज गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सरकार यूनियन बजट 2025 में इकोनॉमी ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान करना चाहती है। अगर इंडिया को 2047 तक विकसित देश बनना है तो इसके लिए जीडीपी में तेज ग्रोथ जरूरी है।
बैठक में इन दिग्गज इकोनॉमिस्ट्स ने लिया हिस्सा
इकोनॉमिस्ट्स के साथ प्रधानमंत्री (Narednra Modi) की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। इसमें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman), नीति आयोग (Niti Ayog) के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी, सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम और पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) और फाइनेंस मिनिस्ट्री के सीनियर अफसर शामिल थे। मीटिंग में कई बड़े इकोनॉमिस्ट्स शामिल थे। इनमें डीके जोशी, मदन सबनवीस, रिद्धम देसाई, चेतन घाटे, सुरजीत एस भल्ला, अशोक गुलाटी, सौम्या कांति घोष सहित कई दिग्गज अर्थशास्त्री शामिल थे।
8 फीसदी ग्रोथ के लिए ये उपाय करने होंगे
इस बैठक के बाद सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इकोनॉमिस्ट्स ने यूनियन बजट से ठीक पहले सरकार को कई सुझाव दिए। इनमें ग्लोबल इकोनॉमी की अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच इंडियन इकोनॉमी की तेज ग्रोथ सबसे बड़ा मसला था। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि इकोनॉमी ग्रोथ बढ़ाने के लिए रोजगार के नए मौके पैदा करने होंगे। सभी सेक्टर में सस्टेनेबल एंप्लॉयमेंट के लिए कदम उठाने होंगे। एजुकेशन और ट्रेनिंग प्रोग्राम में जॉब मार्केट की डिमांड को ध्यान में रख बदलाव करने होंगे। प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के उपायों के साथ ही रूरल इकोनॉमी पर फोकस बढ़ाना होगा।
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर इंडिया के लिए बढ़ सकते हैं मौके
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बन जाएंगे। इससे अमेरिकी पॉलिसी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। खासकर अमेरिकी सरकार के आयात पर टैरिफ बढ़ाने का ग्लोबल ट्रेड पर व्यापक असर पड़ सकता है। अगर ट्रंप के पिछले कार्यकाल को देखें तो इंडिया को लेकर उनकी पॉलिसी पॉजिटिव रही है। ऐसे में अगर अमेरिकी चीन पर दबाव बढ़ाता है तो यह इंडिया के लिए मौका साबित हो सकता है। इंडिया को इन मौकों का फायदा उठाने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।