यूनियन बजट 2025 ऐसे वक्त आ रहा है, जब इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार का सबसे ज्यादा फोकस ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर होगा। इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स में कमी करने की सलाह दी है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी 10-15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना इनकम वाले लोगों को कंपनियों से ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर सरकार टैक्स का बोझ कम करती है तो कंजम्प्शन बढ़ेगा, क्योंकि लोगों के हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे। इनवेस्टर्स और टैक्सपेयर्स ने सरकार के सामने 10 मांगें रखी हैं।
1. स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाए। अभी इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। नई रीजीम में यह 75,000 रुपये है।
2. सालाना 10 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाए। अभी ओल्ड रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 2.5 लाख और नई रीजीम में 3 लाख रुपये है।
3. हेल्थ पॉलिसी पर सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन बढ़ाया जाए। अभी 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति को हेल्थ पॉलिसी पर 25,000 रुपये और 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को 50,000 रुपये डिडक्शन मिलता है।
4. सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को खत्म किया जाए। अगर सरकार इसे खत्म नहीं कर सकती है तो इसके रेट्स घटाए जाए। 23 जुलाई, 2024 को पेश बजट में सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेड पर एसटीटी बढ़ा दिया था।
5. डेट म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के पहले के नियमों को फिर से लागू किया जाए। सरकार ने बजट 2023 में डेट म्यूचुअल फंड के नियमों को पूरी तरह से बदल दिया था।
6. इनकम टैक्स की नई रीजीम में 25 फीसदी टैक्स का नया स्लैब शुरू किया जाए। इस टैक्स स्लैब के तहत सालाना 15 से 18 लाख रुपये इनकम वाले टैक्सपेयर्स आने चाहिए।
7. बैंक की टैक्स-सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट के लॉक-इन पीरियड को घटाकर 3 साल किया जाए। अभी ELSS में लॉक-इन पीरियड 3 साल है।
8. ऐसे सभी पेंशनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट दी जाए, जिन्हें सिर्फ पेंशन और इंटरेस्ट से इनकम होती है।
9. एनपीएस में एन्युटी से हर महीने मिलने वाले पेंशन को टैक्स से छूट दी जाए। इससे रिटायरमेंट के बाद एनपीएस की पेंशन पर निर्भर रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
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10. प्रॉपर्टी बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स के लिए इंडेक्सेशन फिर से शुरू किया जाए। पिछले साल बजट में सरकार ने इसे खत्म कर दिया था।