पिछले एक साल से निवेशक इंश्योरेंस स्टॉक को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं। रेगुलेटरी मार्चे पर जारी अनिश्चितता और मार्जिन को लेकर दबाव की वजह से ऐसा देखने को मिला है। इन शेयरों में निवेशकों का भरोसा बहाल हो सके, इसके लिए एक्सपर्ट्स बजट 2025 की तरफ देख रहे हैं। बजट में रिटेल और हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी रेट में बदलाव, इंश्योरेंस एक्ट में संशोधन और पर्सनल या कॉरपोरेट टैक्स नीतियों को लेकर कई बातें स्पष्ट की जा सकती हैं।
पिछले साल भर में LIC और न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों में 21 पर्सेंट तक की गिरावट देखने को मिल चुकी है, जबकि एसबीआई लाइफ (SBI Life) और एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) में 6 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, पिछले 6 महीने में इन सभी शेयरों में 12-30 पर्सेंट की गिरावट रही है।
ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज (Axis Securities) के मुताबिक, हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस को ज्यादा किफायती बनाने के लिए जीएसटी रेट में कटौती के साथ-साथ अन्य तरह की छूट भी दी जा सकती है, ताकि इंश्योरेंस खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा सके। इस तरह, लाइफ इंश्योरेंस खिलाड़ियो के शेयरों को बढ़ावा मिल सकता है।
ब्रोकरेज फर्म एसबीआई लाइफ, एचडीएफसी लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ को लेकर पॉजिटव है। एक्सपर्ट्स का यह भी सुझाव है कि सरकार को नई टैक्स रिजीम के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में छूट देने और पुरानी टैक्स रिजीम में इस सीमा को बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए। एक्सपर्ट्स ने सभी टैक्सपेयर्स के लिए सेक्शन 80डी के तहत 50,000 रुपये की छूट का प्रस्ताव किया है, जबकि सीनियर सिटिजन के लिए यह सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का सुझाव दिया है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट हासिल की जा सकती है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज में रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, हालांकि, ऐसे बदलाव की संभावना सीमित है। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्सपेयर्स को नए टैक्स रिजीम के लिए प्रेरित कर रही है, जिसमें टैक्स रेट कम है, लेकिन ज्यादातर छूट का प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में FDI सीमा को 75 पर्सेंट से बढ़ाकर 100 पर्सेंट करने का प्रस्ताव दिया था। इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि, अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या बजट सत्र में बिल पेश होगा।