वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से टैक्सपेयर्स को इस बार काफी उम्मीदें हैं। उन्हें टैक्स घटने की उम्मीद है। इकोनॉमिस्ट्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स में राहत देने की सलाह दी है। लेकिन, टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी उम्मीद कम है कि सरकार इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में कोई बदलाव करेगी। उनका मानना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स की नई रीजीम के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं।
सालाना 20 लाख तक इनकम पर मिल सकती है राहत
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस उन टैक्सपेयर्स को राहत देने पर हो सकता है, जिनकी सालाना इनकम 15-20 रुपये तक है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी इनकम टैक्स की नई रीजीम में 12 से 15 लाख रुपये तक की इनकम पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। 15 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। सरकार मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए 15 से 18 लाख रुपये का एक नया टैक्स स्लैब बना सकती है। इसके तहत आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स का रेट 25 फीसदी हो सकता है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़कर 1 लाख हो सकता है
स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ाया जा सकता है। पिछले साल 23 जुलाई को पेश यूनियन बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स की नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया था। हालांकि, उन्होंने इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बढ़ाया था। ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन अभी 50,000 रुपये है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की सलाह दी है। सरकार के ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की उम्मीद कम है। लेकिन, नई रीजीम में सरकार इसे 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर सकती है।
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सिर्फ नौकरी करने वालों को स्टैंडर्ड डिडक्शन
यह ध्यान में रखना होगा कि स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों को मिलता है। सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की नौकरी करने वाले लोगों को स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। दूसरा, यह डिडक्शन इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों ही रीजीम में मिलता है। नई रीजीम की शुरुआत सरकार ने यूनियन बजट 2020 में की थी। शुरुआत में इसमें टैक्सपेयर्स ने दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन, अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले करीब 73 फीसदी इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स इस रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं।