सीनियर सिटीजंस को यूनियन बजट 2025 से काफी उम्मीदें हैं। उन्हें अपनी पेंशन पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ सीनियर सिटीजंस का खर्च तो सिर्फ इंटरेस्ट इनकम से चलता है। बढ़ती महंगाई खासकर खानेपीने की चीजों की कीमतों ने उनका बजट बिगाड़ दिया है। उधार, अस्पातल में इलाज के बढ़ते खर्च ने उन पर दबाव और बढ़ा दिया है। ऐसे में अगर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण उनके लिए 1 फरवरी को बजट में बड़े ऐलान करती हैं तो उनकी बल्ले-बल्ले हो जाएगी।
इनकम टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट
सरकार को सीनियर सिटीजंस के लिए टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाने की जरूरत है। अभी इनकम टैक्स के लिहाज से सीनियर सिटीजंस की दो कैटेगरी है। पहली कैटेगरी में 60 साल से लेकर 80 साल तक के लोग आते हैं, जिन्हें सीनियर सिटीजन कहा जाता है। दूसरी कैटेगरी में 80 साल और इससे ज्यादा उम्र के लोग आते हैं, सुपर सीनियर सिटीजन कहा जाता है। अगर किसी सीनियर सिटीजन की सालाना इनकम 3 लाख रुपये तक है तो इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में उसे टैक्स देने की जरूरत नहीं है। सुपर सीनियर सिटीजन की सालाना इनकम अगर 5 लाख रुपये है तो उसे ओल्ड रीजीम में टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। सरकार को दोनों तरह के सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर देना चाहिए।
इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के पेमेंट पर डिडक्शन का लाभ मिलता है। 60 साल और इससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजंस की हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट 50,000 रुपये है। इसका मतलब है कि सीनियर सिटीजंस की हेल्थ पॉलिसी के 50,000 रुपये तक के प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। अगर प्रीमियम 75 हजार या 80 हजार है तो भी डिडक्शन 50,000 रुपये तक ही क्लेम किया जा सकता है। कोविड के बाद हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम तेजी से बढ़ा है। इसलिए सरकार को सीनियर सिटीजंस के लिए हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर कम से कम 75,000-80,000 रुपये कर देनी चाहिए।
इनकम टैक्स रिटर्न भरने से छूट
अभी ऐसे 75 साल और इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट मिलती है, जिनकी इनकम का स्रोत सिर्फ पेंशन और इंटरेस्ट इनकम है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को 75 साल उम्र की शर्त खत्म कर देनी चाहिए। इसकी जगह सभी ऐसे सीनियर सिटीजंस को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट मिलनी चाहिए, जिनकी इनकम का स्रोत सिर्फ पेंशन और इंटरेस्ट इनकम है। इससे करोड़ों बुजुर्गों को काफी राहत मिलेगी।
एनपीएस में पेंशन को टैक्स छूट
अभी NPS में जमा कुल फंड का 60 फीसदी हिस्सा 60 साल की उम्र पूरी होने पर एकमुश्त मिल जाता है। इस पर टैक्स नहीं लगता है। बाकी 40 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल एन्युटी खरीदने के लिए करना पड़ता है। इस एन्युटी से हर महीने पेंशन मिलती है। अभी पेंशन इनकम टैक्स के दायरे में आता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे टैक्स के दायरे से बाहर करना चाहिए। इससे बुजुर्गों को काफी राहत मिलेगी। टैक्स नहीं चुकाने से उनके हाथ में ज्यादा पेंशन आएंगे।
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मेडिकल टेस्ट्स पर डिडक्शन
बुजुर्गों को ज्यादा मेडिकल केयर की जररूत पड़ती है। ज्यादा उम्र में कई बीमारियां घेर लेती हैं। इसके लिए समय-समय पर कई टेस्ट्स कराने पड़ते हैं। सरकार को मेडिकल केयर पर सालाना एक लाख रुपये के खर्च पर डिडक्शन की इजाजत देनी चाहिए। इसमें ओपीडी, टेस्ट्स सहित इलाज से जुड़े दूसरे खर्च भी शामिल होने चाहिए। इससे करोड़ों बुजुर्गों को काफी राहत मिलेगी।