इस साल अप्रैल-नवबंर के बीच सरकार का फिस्कल डेफिसिट कम रहा है। इससे FY25 में फिस्कल डेफिसिट टारगेट के अंदर रहने को लेकर कोई संदेह नहीं रह गया है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का 4.9 फीसदी टारगेट तय किया है। इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में सरकार का सिर्फ फिस्कल डेफिसिट कम नहीं रहा है। इस दौरान सरकार का पूंजीगत खर्च भी कम रहा है। सवाल है कि क्या पूंजीगत खर्च का कम रहना इकोनॉमी के लिए अच्छा है?
सरकार के पूंजीगत खर्च में भी कमी
इस वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के दौरान सरकार का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) 12 फीसदी घटकर 5.1 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे FY25 में 11.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के टारगेट के पूरा होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। सरकार का कुल खर्च भी सिर्फ 3.3 फीसदी बढ़कर 27.4 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह बीते एक दशक में खर्च में सबसे कम वृद्धि है। कैपिटल एक्सपेंडिचर कम रहने से सरकार का फिस्कल डेफिसिट भी कम रहेगा। लेकिन, यह कंजम्प्शन के लिए अच्छा नहीं है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर टारगेट से 20% कम रह सकता है
इस साल अप्रैल से नवंबर के दौरान फिस्कल डेफिसिट 8.5 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पूरे वित्त वर्ष (FY25) के 16.13 फीसदी के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट के 50 फीसदी से सिर्फ थोड़ा ज्यादा है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कैपिटल एक्सपेंडिचर तय लक्ष्य से 20.2 फीसदी कम रहने का अनुमान जताया है। आम तौर पर लोकसभा चुनाव वाले साल में सरकार के खर्च में कमी देखने को मिलती है। लेकिन, खर्च में यह कमी ऐसे वक्त आई है, जब इकोनॉमी ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.4 फीसदी
इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी पर आ गई। यह बीती 7 तिमाहियों में सबसे कम ग्रोथ है। कुछ इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि इसकी वजह सरकार के पूंजीगत खर्च में आई कमी है। इसीलिए इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के उपाय करने की सलाह दी है। 24 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग में इकोनॉमिस्ट्स ने कंजम्प्शन बढ़ाने के उपाय करने की सलाह दी। CII ने भी सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने वाले उपायों पर फोकस बढ़ाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि इसके लिए सरकार को सालाना 20 लाख रुपये तक इनकम वाले लोगों पर टैक्स का बोझ घटाना चाहिए।