Budget 2025: ग्रामीण इलाकों में बढ़ेगी लोगों की इनकम, बजट में करने होंगे ये उपाय

सरकार ने पिछले साल 23 जुलाई को पेश फुल बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। यह एक साल पहले के संशोधित बजट अनुमान से 4.58 फीसदी ज्यादा था। यूनियन बजट 2025 में सरकार आवंटन में 10-15 फीसदी का इजाफा कर सकती है

अपडेटेड Jan 23, 2025 पर 6:20 PM
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इंडिया दलहन की अपनी जरूरत का 15 फीसदी आयात करता है। खाद्य तेल की जरूरत का करीब 56 फीसदी आयात करना पड़ता है।

सरकार यूनियन बजट में कृषि क्षेत्र और किसानों का खास ख्याल रखती आई है। इस बार भी यूनियन बजट में सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों पर रहेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को एक तरफ किसानों की इनकम बढ़ाने के उपाय करने होंगे तो दूसरी तरफ उन लोगों की सुध लेनी होगी, जिनके पास खेती के लिए अपनी जमीन नहीं है। ऐसे लोग मेहनत-मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं। ग्रामीण इलाकों में ऐसे लोगों के रोजगार के ज्यादा मौके नहीं होते हैं। इससे उन्हें सैकड़ों किलोटमीर दूर शहरों में जाने को मजबूर होना पड़ता है।

रिसर्च के लिए बढ़ाना होगा आवंटन

एग्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को रिसर्च के लिए आवंटन बढ़ाना चाहिए। इससे ऐसे बीज विकसित करने में मदद मिलेगी जिनका इस्तेमाल उन इलाकों में किया जा सकता है, जहां सिंचाई सुविधाओं का अभाव है। इसके लिए सरकार को स्टेट एग्रीकल्चरल रिसर्च लेबोरेट्रीज को रिसर्च के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने होंगे। दूसरा सरकार को किसानों को उनकी फसल के सही दाम दिलाने के उपाय करने होंगे। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का सिस्टम काफी मददगार साबित हो सकता है।


दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ाना होगा

सरकार ने पिछले साल 23 जुलाई को पेश फुल बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। यह एक साल पहले के संशोधित बजट अनुमान से 4.58 फीसदी ज्यादा था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि एग्रीकल्चर और अलायड सेक्टर्स के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। उन्होंने कहा था कि सरकार दलहन और तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है। इसके लिए दोनों के उत्पादन, स्टोरेज और मार्केटिंग पर सरकार फोकस बढ़ाएगी।

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56% फीसदी खाद्य तेल का आयात

इंडिया दलहन की अपनी जरूरत का 15 फीसदी आयात करता है। खाद्य तेल की जरूरत का करीब 56 फीसदी आयात करना पड़ता है। दलहन और खाद्य तेलों के आयात पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों की चल रही कीमतों का सीधा असर उनकी घरेलू कीमतों पर पड़ता है। अगर दलहन और तिलहन के मामले में इंडिया आत्मनिर्भरत होता है तो इससे न सिर्फ सरकार को राहत मिलेगी बल्कि इनकी कीमतों में भी कमी आएगी। उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट में दोनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ा ऐलान करेगी।

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