केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद अलग रेलवे बजट पेश करने की परंपरा खत्म हो गई। जब रेलवे के लिए अलग से बजट पेश किया जाता था तब लोगों की काफी ज्यादा दिलचस्पी रेल बजट में होती थी। इसकी बड़ी वजह यह थी कि रेल बजट में रेल मंत्री नई सुपरफास्ट, एक्सप्रेस और पैसेंजर (छोटी दूरी की ट्रेनें) ट्रेनों का ऐलान करते थे। लोग यह जानना चाहते थे कि उनके शहर से कितनी नई ट्रेनें गुजरने वाली हैं। लेकिन, रेल बजट के यूनियन बजट का हिस्सा बन जाने के बाद यह ट्रेंड खत्म हो गया।य़ अब लोगों खासकर निवेशकों की नजरें इस बात पर लगी रहती हैं कि रेलवे के लिए सरकार ने कितना पूंजीगत खर्च का ऐलान किया है। रेलवे के लिए सरकार के पूंजीगत खर्च बढ़ाने का असर रेलवे स्टॉक्स पर दिखता है।
