सरकार ने ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को नई रीजीम की तरफ अट्रैक्ट करने के लिए यूनियन बजट में एक ऐलान किया। सरकार ने कहा है कि कंपनियां नई रीजीम के तहत भी मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) क्रेडिट्स का इस्तेमाल कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए शर्त यह है कि मैट क्रेडिट्स नई रीजीम के तहत कंपनी की तरफ से चुकाए जाने वाले टैक्स का मैक्सिमम 25 फीसदी हो सकता है।
साथ ही कंपनियों के लिए मैट रेट को 15 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी कर दिया गया है। कंपनियां 31 मार्च, 2026 के बाद मैट बेनेफिट्स क्लेम नहीं कर पाएंगी। बजट में कहा गया है, "यह प्रस्ताव है कि मैट के प्रावधानों के तहत चुकाया गया टैक्स ओल्ड रीजीम में फाइनल टैक्स होगा और किसी नए मैट क्रेडिट की इजाजत नहीं होगी।"
बजट में यह भी कहा गया है कि मैट के तहत टैक्स रेट को 15 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी किया जा रहा है। यह भी कि घरेलू कंपनियों को नई टैक्स रीजीम के तहत मैट क्रेडिट उनकी टैक्स लायबिलिटी का मैक्सिम 25 फीसदी होगी।
आम तौर पर मैट क्रेडिट्स 15 सालों तक एडजस्ट किए जा सकते हैं। बहुत कम ऐसी कंपनियां हैं जिनके पास मैट क्रेडिट्स है और वे ओल्ड रीजीम में इसे एडजस्ट करती हैं। अब तक नई टैक्स रीजीम में कंपनियों को मैट क्रेडिट सहित किसी तरह के एडजस्टमेंट की इजाजत नहीं थी। फाइनेंस मिनिस्टर ने एक अलग ऐलान में यह भी कहा है कि नॉन-रेजिडेंट्स को मैट प्रोविजन के तहत प्रिजम्प्टिव बेसिस पर टैक्स चुकाने से छूट मिलेगी।