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Budget 2026: क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स के लिए बैलेंस टैक्स स्ट्रक्चर बनाने की जरूरत

Budget 2026: वित्त अधिनियम 2022 के साथ भारत में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों को पहली बार स्पष्ट रूप से टैक्स के दायरे में लाया गया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 30, 2026 पर 3:19 PM
Budget 2026: क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स के लिए बैलेंस टैक्स स्ट्रक्चर बनाने की जरूरत
वित्त अधिनियम 2022 के साथ भारत में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों को पहली बार स्पष्ट रूप से टैक्स के दायरे में लाया गया।

Budget 2026: वित्त अधिनियम 2022 के साथ भारत में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों को पहली बार स्पष्ट रूप से टैक्स के दायरे में लाया गया। इन्हें सामूहिक रूप से वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) कहा गया। केंद्रीय बजट 2022 में वित्त मंत्री ने यह साफ किया था कि डिजिटल परिसंपत्तियों में लेनदेन का आकार और रफ्तार इतनी तेजी से बढ़ रही है कि इसके लिए एक अलग टैक्स ढांचा जरूरी हो गया है। यह कदम इस बात का संकेत था कि सरकार ने भारत की वित्तीय व्यवस्था में क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स की बढ़ती भूमिका को स्वीकार कर लिया है और अब इन्हें अनौपचारिक दायरे से निकालकर टैक्स सिस्टम के भीतर लाना चाहती है।

हाल के संसदीय आंकड़े बताते हैं कि भारत में क्रिप्टो इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में क्रिप्टो लेनदेन का कुल आंकड़ा 51,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। इन लेनदेन से मिलने वाला टीडीएस कलेक्शन भी बढ़कर लगभग 512 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसका साफ मतलब है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट्स अब सिर्फ कुछ लोगों का शौक या सीमित निवेश का साधन नहीं रहे, बल्कि देश के वित्तीय बाजार का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं।

इसके बावजूद, क्रिप्टो से जुड़ा नियामकीय ढांचा अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। टैक्स नियम तो बना दिए गए हैं, लेकिन वे काफी सख्त हैं और कई जगह व्यावहारिक दिक्कतें पैदा करते हैं। फिलहाल VDA के ट्रांसफर से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लागू है। इसमें खरीद लागत के अलावा किसी भी तरह की कटौती की अनुमति नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर किसी को क्रिप्टो में नुकसान होता है, तो उसे न तो किसी अन्य आय से समायोजित किया जा सकता है और न ही आगे के सालों में कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है। इसके अलावा, हर लेनदेन पर 1 प्रतिशत टीडीएस भी काटा जाता है, जिसकी न्यूनतम सीमा सिर्फ 10,000 रुपये है।

आम निवेशकों के लिए यह नियम काफी भारी साबित हो रहे हैं। बार-बार टीडीएस कटने से ट्रेडिंग के लिए पूंजी फंस जाती है और छोटे निवेशकों के लिए सक्रिय रूप से ट्रेड करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि कई लोग विदेशी एक्सचेंजों या अनौपचारिक प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं। यह स्थिति सरकार के लिए भी नुकसानदायक है, क्योंकि इससे घरेलू प्लेटफॉर्म कमजोर होते हैं और टैक्स अनुपालन पर भी असर पड़ता है। हालांकि क्रिप्टो अपनाने के मामले में भारत अब भी दुनिया के अग्रणी देशों में है, लेकिन घरेलू क्रिप्टो इकोसिस्टम लगातार अनिश्चितता और सीमाओं से जूझ रहा है।

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