प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर को प्रमुख अर्थशास्त्रियों के साथ अगले वित्त वर्ष के यूनियन बजट पर चर्चा की। इकोनॉमिस्ट्स ने राजकोषीय दबाव, परिवारों की सेविंग्स में कमी, आत्मनिर्भर भारत और देश को विकसित देश बनाने के उपायों को लेकर अपने सुझाव दिए। पीएम मोदी ने मीटिंग में हेल्थ, एजुकेशन, रोजगार, स्किल और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पिछले सालों में करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।
सरकार को एफआरबीएम फ्रेमवर्क पर लौटने की सलाह
कुछ सीनियर इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को अपनी फिस्कल पॉलिसी को एफआरबीआरएम फ्रेमवर्क से लिंक करने की सलाह दी। एक सूत्र के मुताबिक, इकोनॉमिस्ट्स ने कहा कि यह ऑरिजिनल FRBM फ्रेमवर्क पर लौटने का सही समय है। उनका यह भी कहना था कि पब्लिक एक्सपेंडिचर को धीरे-धीरे 3 फीसदी के करीब लाया जाना चाहिए। इससे प्राइवेट सेक्टर के लिए फाइनेंशियल रिसोर्सेज उपलब्ध होंगे। FY26 के बजट में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का टारगेट रखा था, जो जीडीपी के 3 फीसदी से ज्यादा है।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत रोडमैप पर भी चर्चा
इस बैठक में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत रोडमैप पर भी व्यापक चर्चा हुई। कुछ इकोनॉमिस्ट्स ने क्लाइमेट फाइनेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई टेक्नोलॉजी एजुकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किल के लिए पहल करने की सलाह दी। हाउसहोल्ड फाइनेंशियल सेविंग्स में कमी के ट्रेंड पर भी चिंता जताई गई। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि परिवार की सेविंग्स में गिरावट जारी रही तो इसका असर सरकार और प्राइवेट सेक्टर दोनों पर पड़ेगा। दोनों के लिए फाइनेंसिंग के ऑप्शंस घट सकते हैं।
हाउसहोल्ड सेविंग्स में लगातार गिरावट चिंता की वजह
अर्थशास्त्रियों ने कहा, "हाउसहोल्ड फाइनेंशियल सेविंग्स जीडीपी के 10-10.5 फीसदी से घटकर करीब 7-7.5 फीसदी पर आ गई है। डोमेस्टिक सेविंग्स घट रही है और फॉरेन कैपिटल फ्लो अनिश्चित बना हुआ है। सेविंग्स के रिकवर नहीं करने पर 2 फीसदी के करेंट अकाउंट डेफिसिट तक को पूरा करने में मुश्किल आ सकती है।" अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना था कि घटती हाउसहोल्ड सेवलिंग्स के बीच लगातार ज्यादा पूंजीगत खर्च लिक्विडिटी पर दबाव बना रहा है। इसका असर बॉन्ड्स यील्ड पर पड़ रहा है।
सरकार के कुल खर्च में बढ़ रही इंटरेस्ट पर खर्च की हिस्सेदारी
मीटिंग में शामिल लोगों ने सरकार के कुल खर्च में इंटरेस्ट पर खर्च की बढ़ती हिस्सेदारी पर चिंता जताई। उनका कहना था कि इसका असर आने वाले सालों में सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होन पर भी सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। एक सूत्र ने बताया, "सिर्फ बॉरोइंग को लेकर चिंता नहीं है बल्कि चिंता की बात यह है कि इंटरेस्ट पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। आज सरकार के कुल खर्च का करीब 25-28 फीसदी सिर्फ इंटरेस्ट पेमेंट के लिए इस्तेमाल होता है।"