Union Budget 2026: बजट सिर्फ आय-व्यय का ब्योरा नहीं, इससे 140 करोड़ आबादी के सपने जुड़े होते हैं

भारत का यूनियन बजट सिर्फ इनकम और खर्च का अनुमान नहीं होता है। इससे देश की करीब 140 करोड़ आबादी की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सरकार एक तरफ यूनियन बजट में इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने वाले रिफॉर्म्स का ऐलान करती है तो दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए कदम उठाती है

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 3:43 PM
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यूनियन बजट सरकार के लिए अपनी वितीय सेहत के बारे में भी बताने का बड़ा मौका होता है।

आम तौर पर बजट का मतलब इनकम और खर्च के अनुमान से होता है। लेकिन, जब बात यूनियन बजट की होती है तो इसके मायने बदल जाते हैं। भारत का यूनियन बजट सिर्फ इनकम और खर्च का अनुमान नहीं होता है। इससे देश की करीब 140 करोड़ आबादी की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सरकार एक तरफ यूनियन बजट में इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने वाले रिफॉर्म्स का ऐलान करती है तो दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए कदम उठाती है। रोजगार के मौके बढ़ाने, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने और टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर बजट का फोकस होता है।

हर साल 5 महीने पहले शुरू हो जाता है बजट बनाने का काम

सरकार Union Budget तैयार करने की प्रक्रिया करीब 5 महीने पहले शुरू कर देती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हर साल उद्योग और व्यापार से जुड़े लोगों के साथ ही अर्थशास्त्रियों, किसान सगंठनों, इनवेस्टर्स कम्युनिटी, टैक्सपेयर्स और आम लोगों की उम्मीदें जानने की कोशिश करती हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारी दूसरे मंत्रालयों के अधिकारियों से अगले वित्त वर्ष के लिए उनके प्लान और ऐलोकेशन के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।


सरकार बजट में अपनी वित्तीय सेहत की भी जानकारी देती है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि Union Budget सरकार के लिए अपनी वितीय सेहत के बारे में भी बताने का बड़ा मौका होता है। सरकार हर यूनियन बजट में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट तय करती है। सरकारी को कोशिश अपने फिस्कल डेफिसिट को घटाने की होती है। यूनियन बजट 2025 में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट के लिए 4.4 फीसदी का टारगेट तय किया था। सरकार का फिस्कल डेफिसिट जितना कम रहता है, सरकार को बाजार से उतना कम उधार लेना पड़ता है।

इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर फोकस

पिछले कई सालों से यूनियन बजट में पूंजीगत खर्च पर सरकार का खास फोकस रहा है। पूंजीगत खर्च का टारगेट पिछले कुछ सालों से 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। इसका ज्यादातर हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होता है। सरकार की सोच है कि पूंजीगत खर्च बढ़ने से इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इससे एक तरफ लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे इकोनॉमी में डिमांड और कंजम्प्शन बढ़ता है। दूसरी तरफ देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार तेज बनाए रखने के होंगे उपाय

यूनियन बजट 2026 ऐसे वक्त आ रहा है, जब सरकार ने जीएसटी में बड़ा रिफॉर्म्स लागू किया है। इससे 300 से ज्यादा आइटम्स की कीमतों में कमी आई है। उधर, यूनियन बजट 2025 में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री करने से भी लोगों को बड़ी राहत मिली है। इससे उनकी जेब में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बच रहे हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ रही है। रिटेल इनफ्लेशन रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है। साथ ही इकोनॉमी की ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा है। सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.2 फीसदी रही, जो उम्मीद से ज्यादा है।

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आम आदमी को राहत देने के भी हो सकते हैं बड़े ऐलान

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट 2026 में सरकार का फोकस आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाने पर होगा। सरकार रोजगार के मौके बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान कर सकती है। इकोनॉमी की ग्रोथ तेज बनाए रखने पर भी उसका फोकस होगा। एग्रीकल्चर के लिए ऐलोकेशन बढ़ाने के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने के उपाय बजट में होंगे। आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने का भी ऐलान हो सकता है। साथ ही टैक्सपेयर्स को राहत देने की भी कोशिश हो सकती है।

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