सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने यूनियन बजट 2026 को लेकर सरकार को सलाह दी है। इंडस्ट्री ने कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के यूनियन बजट में सरकार का फोकस वैल्यू क्रिएशन और समय पर इनसेंटिव के डिस्बर्समेंट पर होना चाहिए। सरकार ने पिछले कुछ सालों में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ाया है। इससे इस इंडस्ट्री में निवेश बढ़ाने में मदद मिली है।
मंजूर हो चुके प्रोजेक्ट्स के लिए ऐलोकेशन बढ़ाया जाए
इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के प्रेसिडेंट अशोक चंडाक ने कहा कि सेक्टर का मानना है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और डिजाइन लिंक्ड इनसेंटिव (DLI) स्कीम को जारी रखा जाना चाहिए। इसके अलावा सरकार को उन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट में ऐलोकेशन बढ़ाना चाहिए, जो पहले एप्रूव्ड हो चुके हैं।
इनसेंटिव का डिस्बर्समेंट समय पर किया जाए
उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर फैब्स और ओएसएटी फैसिलिटीज के लिए काफी पूंजी की जरूरत पड़ती है और इसमें रिजल्ट्स आने में काफी समय लगता है। इसलिए समय पर इनसेंटिव का डिस्बर्समेंट जरूरी है।" उन्होंने आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर एसेंबली एंड टेस्ट सेगमेंट के बारे में ये बातें कही। उनका मानना है कि इससे कंस्ट्रक्शन और कपैसिटी बढ़ाने के दौरान कैश-फ्लो का प्रेशर घटेगा।
1 फरवरी को बजट पेश कर सकती हैं निर्मला सीतारमण
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को Union Budget पेश कर सकती हैं। वह इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए टैक्स और डेप्रिसिएशन के मामले में राहत का ऐलान बजट में कर सकती हैं। IESA के प्रेसिडेंट ने 15 फीसदी की रियायती मैन्युफैक्चरिंग रीजीम में संसोधन कर इसके तहत सेमीकंडक्टर फैब्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और एडवान्स्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को लाने की मांग की।
डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन पर होना चाहिए सरकार का फोकस
चंडाक ने कहा कि एलिजिबिलिटी विंडो को और 5 साल तक बढ़ाने से बड़े फैब्रिकेशन प्रोजेक्ट्स को मदद मिलेगी। ऐसे कई प्रोजेक्ट्स को एप्रूवल से लेकर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने में कई सालों का समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार को अपना फोकस वॉल्यूम आधारित मैन्युफैक्चरिंग की जगह डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन पर शिफ्ट करना चाहिए।
पीएलआई बेनेफिट्स को वैल्यू एडिशन से लिंक किया जाए
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स के एक्सपोर्ट इनसेंटिव को सिर्फ शिपमेंट वॉल्यूम की जगह इंडिया में हुए वैल्यू एडिशन के साथ लिंक करना चाहिए। उन्होंने कहा, "लोकलाइजेशन पर भी फोकस बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए पीएलआई बेनेफिट्स को हायर वैल्यू एडिशन और मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर्स कंपोनेंट्स और सेमीकडक्टर्स से लिंक किया जा सकता है।"
सरकार के सपोर्ट वाले टेस्टिंग सेंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए
इससे इंडिया की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) ईकोसिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। चंडाक ने कहा कि सरकार को बजट में टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क को आसान बनाने पर भी फोकस करना चाहिए। इसके लिए सरकार के सपोर्ट वाले टेस्टिंग सेंटर्स को बढ़ाया जा सकता है। टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन फीस कम की जा सकती है। खासकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए ऐसा किया जा सकता है।