Budget 2026: रत्न और आभूषणों पर ड्यूटी को बनाए जाए तर्कसंगत, GST में हो कटौती; ज्वैलरी सेक्टर ने वित्त मंत्री को भेजी विशलिस्ट

Budget 2026: GJEPC ने प्री-बजट सुझावों में भारतीय निर्यात को अधिक लागत प्रभावी बनाने की सिफारिश की है। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल ने GST सुधारों, हॉलमार्किंग, डायरेक्ट टैक्सेज में सुधार और उद्योग-व्यापी सुधारों की अपील की है

अपडेटेड Jan 15, 2026 पर 1:48 PM
Story continues below Advertisement
GJC ने हॉलमार्क वाली ज्वेलरी के एक्सचेंज पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट का भी प्रस्ताव दिया है।

भारत के रत्न और आभूषण (जेम्स एंड ज्वैलरी) सेक्टर ने केंद्रीय बजट 2026-27 में ड्यूटी को तर्कसंगत बनाए जाने, प्रक्रियात्मक सुधार और GST में कमी की मांग की है। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपने प्री-बजट सुझावों में भारतीय निर्यात को अधिक लागत प्रभावी बनाने की सिफारिश की है। साथ ही भारत को डायमंड ट्रेडिंग और वैल्यू डिस्कवरी सेंटर के रूप में स्थापित करने के लिए कई प्रस्ताव दिए हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली का कहना है, "वैश्विक रत्न और आभूषण व्यापार एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। अमेरिका के हाई टैरिफ, उपभोक्ताओं की बदलती चॉइस और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव को देखते हुए, यह अनिवार्य है कि भारत अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखे।"

सहायक सुधार और स्थिर ट्रेड इकोसिस्टम क्यों जरूरी


भंसाली ने आगे कहा कि प्री-बजट प्रपोजल भारतीय निर्यात को अधिक लागत प्रभावी बनाने, SEZ संचालन को मजबूत करने और पॉलिसी फ्रेमवर्क में ऐसे सुधार करने पर केंद्रित हैं, जो निवेश और कौशल विकास को प्रोत्साहित करते हैं। सहायक सुधारों और एक स्थिर ट्रेड इकोसिस्टम के साथ, भारत न केवल मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ज्वैलरी मार्केट में विकास के अगले चरण का नेतृत्व भी कर सकता है।

GJEPC के कुछ अहम सुझाव

  • मौजूदा 4 प्रतिशत सेफ हार्बर टैक्स बहुत अधिक माना जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधा डालता है। GJEPC ने सरकार से कटे और पॉलिश किए गए हीरों और रंगीन रत्नों पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने की अपील की है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी।
  • GJEPC ने सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में संशोधन की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसा इसलिए ताकि सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को तेजी से विकसित हो रहे, निर्यात-संचालित रत्न और आभूषण क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक बनाया जा सके।
  • काउंसिल ने स्पीड, पारदर्शिता और लागत दक्षता में सुधार के लिए रिस्क-बेस्ड कस्टम क्लीयरेंस, AI-इनेबल्ड डिजिटल अप्रेजल्स और विश्वसनीय निर्यातकों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन जैसे सुधारों की सिफारिश की है।

Budget 2026 Expectations: मार्केट को इन ऐलानों का इंतजार, ये स्टॉक्स कराएंगे निवेशकों की चांदी!

सोने और चांदी की ज्वेलरी पर 1.25 प्रतिशत हो GST

इस बीच, ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार को GST सुधारों, हॉलमार्किंग, डायरेक्ट टैक्सेज में सुधार और उद्योग-व्यापी सुधारों की अपील की है। GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े का कहना है, "सोने और चांदी की ज्वेलरी पर GST को 3 प्रतिशत से घटाकर 1.25 प्रतिशत किया जाना चाहिए। इससे रेशियो सही होगा, घरों पर फाइनेंशियल स्ट्रेस कम होगा, और टैक्स वाले ट्रांजेक्शन का दायरा बढ़ेगा।"

GJC ने हॉलमार्क वाली ज्वेलरी के एक्सचेंज पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट का भी प्रस्ताव दिया है। साथ ही बड़े इंटरनेशनल गेटवेज पर डिजिटल क्लेम और वेरिफिकेशन सिस्टम बनाकर टूरिस्ट GST रिफंड स्कीम को जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह किया है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।