सरकार को अगले वित्त वर्ष में आरबीआई और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में इस बारे में बताया। यह इस वित्त वर्ष के दौरान आरबीआई से सरकार को मिले 2.68 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड से ज्यादा है।
आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड सरकार के रेवेन्यू का बड़ा स्रोत रहा है। आरबीआई सरकार के पैसे का प्रबंधन करता है। इस पैसे पर उसे जो जो कमाई होती है वह उसे सरकार को डिविडेंड के रूप में देता है। इस वित्त वर्ष के दौरान आरबीआई से मिले डिवडेंड से सरकार को फिस्कल डेफिसिट को बढ़ने से रोकने में मदद मिली है। हालांकि, नॉमिनल ग्रोथ में कमी आई है और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर भी बढ़ा है।
इकोनॉमिस्ट्स, ट्रेजरी हेड्स और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच किए गए मनीकंट्रोल के पोल के मुताबिक, सरकार को यूनियन बजट 2026 में आरबीआई और सरकारी बैंकों से डिविडेंड के रूप में 2-3 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। यह पिछले बजट में अनुमानित 2.56 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड से ज्यादा है। यह अनुमान सही साबित हुआ है।
ज्यादा डिविडेंड के सरकार के अनुमान में सरकारी बैंकों की स्ट्ऱॉन्ग बैलेंसशीट और करेंसी मार्केट में ज्यादा उतारचढ़ाव का हाथ हो सकता है। रुपये को संभालने के लिए आरबीआई को काफी डॉलर बेचने पड़े हैं। इससे उसका सरप्लस इनकम बढ़ा है। बजट 2026 में जिस डिविडेंड का अनुमान लगाया गया है वह FY27 में मिलेगा।
पिछले बजट में जिस डिविडेंड का अनुमान लगाया गया था वह इस फाइनेंशियल ईयर के खत्म होने के बाद मिलेगा। इसकी वजह यह है कि सरकारी बैंक अपने सालाना नतीजें फाइनल करने के बाद डिविडेंड का ऐलान करते हैं और उसे ट्रांसफर करते हैं। आरबीआई आम तौर पर मई में सरकार को डिविडेंड का पैसा ट्रांसफर करता है। मई 2025 में आरबीआई ने सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था। उसे बाजार में उतारचढ़ाव के बीच फॉरेन एक्सचेंज से ज्यादा इनकम हुई थी।