सरकार यूनियन बजट 2026 में ड्रोन की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इनसेंटिव स्कीम का ऐलान कर सकती है। यह ड्रोन शक्ति एनिशिएटिव के तहत होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस 2-टियर सब्सिडी फ्रेमवर्क से देश में मानवरहित एरियल व्हीकल्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
लॉन्ग टर्म फिस्कल सपोर्ट में सरकार की दिलचस्पी
एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया, "सरकार ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को लॉन्ग-टर्म फिस्कल सपोर्ट देना चाहती है। इससे कंपनियां आउटपुट आधारित इनसेंटिव की जगह निश्चितितता के साथ निवेश कर सकेंगी।" यह स्कीम ड्रोन सेक्टर को लेकर सरकार के पिछले कई सालों में सबसे बड़ा फिस्कल सपोर्ट हो सकता है।
पांच साल की इस स्कीम पर 10,000 करोड़ खर्च होंगे
यह प्रस्तावित स्कीम पांच सालों के लिए होगी। इसका पीरियड छठे वित्त आयोग के साथ चलेगा। इस स्कीम पर करीब 10,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने सिद्धांत रूप में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि पूरे पीरियड के खर्च का पेमेंट अपफ्रंट होगा। ड्रोन और ड्रोन कंपोनेंट्स के लिए पहसे से पीएलआई स्कीम है। लेकिन, यह वैल्यू एडिशन और आउटपुट से लिंक्ड है। नई स्कीम में इनवेस्टमेंट आधारित इनसेंटिव का प्रावधान होगा।
टर्नओवर की न्यूनतम सीमा जैसी शर्तें होंगी
नई स्कीम के फ्रेमवर्क में इनसेंटिव के पहले लेयर के तहत ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर खर्च होने वाले कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 10-15 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। इसके लिए कुछ शर्तें होंगी। इनमें टर्नओवर की न्यूनतम सीमा और तय समय में निवेश जैसी शर्तें शामिल हैं। एक सूत्र ने बताया, "मकसद कपैसिटी क्रिएशन में मदद करना है।" कंपनियों को स्कीम का हिस्सा बनने के निश्चित समय के अंदर कैपिटल इनवेस्टमेंट करना होगा। इससे पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करने में तेजी आएगी।
ड्रोन बनाने वाली भारतीय कंपनियों की क्षमता बढ़ेगी
दूसरे लेयर के तहत 10-15 फीसदी सब्सिडी मिलेगी, जो मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट से लिंक्ड होगी। इससे इंडियन मैन्युफैक्चरर्स के सामने प्राइसिंग गैप की दिक्कत दूर करने में मदद मिलेगी। अभी कई जरूरी कंपोनेंट्स का इंपोर्ट करना पड़ता है। सूत्र ने कहा, "मैन्युफैक्चरिंग लिंक्ड इनसेंटिव्स का मकसद प्राइसिंग के मामले में इंडियन कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाना है। आउटपुट सपोर्ट के बिना इंडिया में बने ड्रोन को आयातित ड्रोन का मुकाबला करने में दिक्कत आती है।"