यूनियन बजट 2026 का ज्यादा फोकस जिन सेक्टर्स पर होगा, उनमें एग्रीकल्चर शामिल है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सरकार को यूनियन बजट से अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। अनुमान है कि सरकार एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग के लिए आवंटन बढ़ाएगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।
खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने पर होगा जोर
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशंस और कोऑपरेटिव सरकार की प्राथमिकता में होंगे। उन्हें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल के जरिए कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने की उम्मीद है। इंडिया में अब भी विकसित देशों के मुकाबले कृषि में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काफी कम है। इससे उत्पादकता विकसित देशों के मुकाबले कम है।
क्लाइमेट-स्मार्ट फार्मिंग पर फोकस बढ़ाएगी सरकार
ग्रांट थॉर्टन भारत के पार्टनर पद्मानंद वी ने कहा, "उम्मीद है कि बजट में पीपीपी के जरिए डायरेक्ट इंफ्रास्ट्रक्टर पर खर्च बढ़ेगा। सरकार अमेरिका और चीन जैसे विकसित सिस्टम वाले देशों की तरह इनवेस्टमेंट सब्सिडीज भी बढ़ाएगी।" कंसल्टेंसी फर्म ईवाय का कहना है कि क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर पर ध्यान नहीं दिया गया तो अगले 15 सालों में कृषि क्षेत्र को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के उपाय होंगे
ईवाय ने बताया, "सरकार एमएसपी को तर्कसंगत बनाने के साथ ही एमएसपी का इस्तेमाल बतौर प्लेटफॉर्म क्लाइमेट-अनुकूल फार्मिंग के लिए कर सकती है।" एग्री इंडस्ट्री का कहना है कि सरकार को डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी), एमएमपी सपोर्ट और ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर के लिए सब्सिडी से आगे जाकर निवेश पर होने वाले खर्च को बढ़ाना होगा।
कृषि कम्युनिटी की इनकम बढ़ाने पर फोकस
PwC India के पार्टनर शशि कांत सिंह ने कहा, "रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस और एक्सपोर्ट्स पर सरकार का फोकस हो सकता है।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में लॉन्ग टर्म में सस्टेनेबल स्ट्रक्चर रिफॉर्म्स पर फोकस होना चाहिए। साथ ही कृषि समुदाय की इनकम बढ़ाने के भी ठोस उपाय होने चाहिए। मिट्टी की सेहत, यील्ड और उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे भारत दुनिया को फूड सप्लाई करने वाला देश बन सकता है।
कुल कृषि खर्च का ज्यादा हिस्सा डीबीटी और सब्सिडी पर
सरकार ने FY25 के लिए एग्री और अलायड सेक्टर के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। FY26 के लिए यह घटकर 1.37 लाख करोड़ रुपये रह गया। अगर एमएसपी और इनपुट सब्सिडी पर खर्च को शामिल किया जाए तो कुल खर्च 3.91 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाता है। पद्मानंद वी ने कहा कि इससे पता चलता है कि बजट का बड़ा हिस्सा डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर और सब्सिडीज पर खर्च होता है। कृषि क्षेत्रों में मशीनों के इस्तेमाल पर निवेश बढ़ाने पर ज्यादा खर्च नहीं होता है। यह खर्च 30,000 करोड़ रुपये से कम था।
एडिबल ऑयल के आयात पर निर्भरता घटाने के उपाय
EY ने कहा है, "यूनियन बजट 2026 में सरकार को निवेश बढ़ाने की कोशिश करनी होगी, क्योंकि भारत अब भी काफी मात्रा में खाने वाले तेल का आयात करता है। एडिबल ऑयल का 60 फीसदी जरूरत भारत आयात से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू कपैसिटी बढ़ाना न सिर्फ बड़ा लक्ष्य होना चाहिए बल्कि यह लंबी अवधि में फूड सिक्योरिटी के लिए भी जरूरी है।"