सरकार अगले वित्त वर्ष में अपने फिस्कल डेफिसिट को पूरा करने के लिए उधार से 11.7 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। यह जीडीपी का 4.3 फीसदी होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में यह ऐलान किया।
सरकार अगले वित्त वर्ष में अपने फिस्कल डेफिसिट को पूरा करने के लिए उधार से 11.7 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। यह जीडीपी का 4.3 फीसदी होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में यह ऐलान किया।
अगले वित्त वर्ष में सरकार का उधार से 11.7 लाख करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट इस वित्त वर्ष के 14.82 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से कम है। अगले वित्त वर्ष में सरकार का नेट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपये होगा।
सरकार के बाजार से कर्ज जुटाने के अमाउंट का सीधा असर इकोनॉमी में इंटरेस्ट रेट पर पड़ता है। अनुमान से ज्यादा पैसा सरकार के कर्ज से जुटाने का असर दूसरे सभी बॉन्ड इश्यू पर पड़ता है। इसमें सॉवरेन और कॉर्पोरेट दोनों तरह के बॉन्ड्स शामिल हैं। अगर सरकार बाजार से कर्ज के जरिए कम पैसा जुटाती है तो इससे इकोनॉमी में इंटरेस्ट रेट में कमी आ सकती है।
सरकार पब्लिक सर्विसेज पर खर्च करने के लिए एक तरह से बाजार से लोन लेती है। आम तौर पर सरकार गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और ट्रेजरी बिल के जरिए बाजार से यह पैसा जुटाती है। मनीकंट्रोल के पोल के मुताबिक, FY27 में सरकार बाजार से कुल 15-17 लाख करोड़ रुपये जुटा सकती है। इसकी वजह रिडेम्प्शन में उछाल है। हालांकि, सरकार का फोकस फिस्कल कंसॉलिडेशन पर बना हुआ है।
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