Budget 2026: आज 27 जनवरी को होगी हलवा सेरेमनी, जानिये हर साल क्यों होती है ये रस्म?

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियां अब अपने आखिरी चरण में पहुंच गई हैं। इसी कड़ी में आज 27 जनवरी वित्त मंत्रालय में पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट तैयार करने से जुड़े सीनियर अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे

अपडेटेड Jan 27, 2026 पर 11:10 AM
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Budget 2026: आज वित्त मंत्रालय में पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जा रहा है। (File Photo)

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियां अब अपने आखिरी चरण में पहुंच गई हैं। इसी कड़ी में आज 27 जनवरी वित्त मंत्रालय में पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट तैयार करने से जुड़े सीनियर अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे। हलवा सेरेमनी का मतलब सिर्फ मिठाई बांटना नहीं है, बल्कि यह संकेत होता है कि बजट का गोपनीय और सबसे संवेदनशील दौर अब शुरू हो गया है।

हलवा सेरेमनी के बाद बजट से सीधे जुड़े अधिकारी लॉक-इन पीरियड में चले जाते हैं। इस दौरान करीब 60 से 70 अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। वह न तो घर जा सकते हैं और न ही किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य संचार साधनों का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि बजट से जुड़ी कोई भी अहम जानकारी, जैसे टैक्स बदलाव या खर्च से जुड़े फैसले पहले से लीक न हो सकें।

बजट का साल : यूनियन बजट 2026-27


हलवा सेरेमनी: मंगलवार, बजट पेश होने से पहले

लॉक-इन अधिकारी: लगभग 60–70 अधिकारी और कर्मचारी

बजट पेश होने की तारीख: 1 फरवरी 2026, रविवार

बजट की छपाई का स्थान: नॉर्थ ब्लॉक प्रेस

इस बार के यूनियन बजट 2026-27 को लेकर माना जा रहा है कि सरकार का फोकस डि-रेगुलेशन और आर्थिक विकास पर रहेगा। सरकार का टारगेट निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है, ताकि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक बजट में ऐसे कदम देखने को मिल सकते हैं, जिनसे मंजूरी की प्रक्रिया तेज हो, नियमों की जटिलता कम हो और प्राइवेट निवेश को प्रोत्साहन मिले। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारतीय इंडस्ट्री को कंपिटिशन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हलवा सेरेमनी के साथ ही बजट से जुड़ी गोपनीयता और सख्त हो जाती है। पहले के समय में बजट डॉक्यूमेंट पूरी तरह छपाई पर निर्भर होते थे, इसलिए लॉक-इन पीरियड लंबा होता था। अब ज्यादातर काम डिजिटल तरीके से होता है, इसलिए यह पीरियड थोड़ा कम हो गया है।

भारतीय परंपरा में किसी भी बड़े काम की शुरुआत मिठाई से करना शुभ माना जाता है। हलवा सेरेमनी इसी परंपरा का हिस्सा है। प्रशासनिक रूप से यह संदेश देती है कि अब बजट पर सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और डॉक्यूमेंट अंतिम रूप ले चुका है। अब बस 1 फरवरी का इंतजार है, जब वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करेंगी।

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