साल 2025 होम लोन लेने वालों के लिए राहत लेकर आया। करीब पांच साल बाद आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट में कमी का सिलसिला शुरू किया। इससे रेपो रेट 6.5 फीसदी से गिरकर 5.25 फीसदी पर आ गया। कई लोगों का मानना है कि सरकार यूनियन बजट 2026 में घर खरीदने वाले लोगों के हित में हाउसिंग लोन में रिफॉर्म्स करेगी। इससे घर खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने के साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। पिछले 2-3 सालों में घरों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है।
हाउसिंग लोन के इंटरेस्ट पेमेंट पर ज्यादा डिडक्शन
होम बायर्स टैक्स में ज्यादा छूट और होम लोन से जुड़े नियमों में बदलाव चाहते हैं। वे इनकम टैक्स एक्ट के तहत डिडक्शन के पुराने नियमों में भी बदलाव चाहते हैं। Andromeda Sales and Distribution के को-सीईओ Raoul Kapoor ने कहा, "सेक्शन 24(b) के तहत इंटरेस्ट पर डिडक्शंस की लिमिट सालाना 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि यह आज प्रॉपर्टी के प्राइसेज और साइज से मैच नहीं करता है।"
प्रिंसिपल रीपेमेंट पर डिडक्शन के लिए अलग लिमिट
उन्होंने प्रिंसिपल रीपेमेंट के लिए अलग से 2.5-3 लाख रुपये की लिमिट या सेक्शन 80सी की कुल 1.5 लाख रुपये की लिमिट बढ़ाने की भी सलाह दी। इससे शहरों में घर खरीदने वाले लोगों को काफी फायदा होगा। हाउसिंग लोन पर टैक्स बेनेफिट्स अभी सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में मिलता है। इनकम टैक्स की नई रीजीम में होम लोन पर किसी तरह का फायदा नहीं मिलता है। अर्बन मनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर विक्रम सिंह ने कहा, "कई डिडक्शंस काफी पहले तय किए गए थे, जब प्रॉपर्टी की कीमतें और लाइन के साइज काफी कम थे। इनफ्लेशन-एडजस्टेड रिलीफ के लिए इनमें बदलाव करना जरूरी है।"
सेक्शन 80ईईए के तहत टैक्स बेनेफिट्स दोबारा शुरू किया जाए
सेक्शन 80ईईए के तहत पहली बार घर खरीदने वाले लोगों को होम लोन के इंटरेस्ट पेमेंट पर 50,000 रुपये का डिडक्शन मिलता था। यह डिडक्शन मार्च 2022 में बंद कर दिया गया। सिंह ने कहा, "सेक्शन 80ईईए के बेनेफिट्स को दोबारा शुरू करना जरूरी है। इससे कम कीमत वाले सेगमेंट में पहली बार घर खरीदने वाले लोगों को अतिरिक्त टैक्स डिडक्शंस मिल जाता है। यह बेनेफिट्स इनकम टैक्स की नई रीजीम में भी मिलना चाहिए।"
शुरुआती सालों में इंटरेस्ट सबवेंशन या EMI में रिलीफ
कपूर ने कहा, "होम लोन को और अफोर्डेबल बनाने के लिए होम बायर्स पॉलिसी के मामले में सपोर्ट चाहते हैं। खासकर पहली बार घर खरीदने वाले लोगों को सरकार से यह उम्मीद है। वे लोन के शुरुआती सालों में इंटरेस्ट सबवेंशन या EMI में रिलीफ चाहते हैं।"
अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए लिमिट बढ़ाई जाई
सिंह ने कहा, "हाउसिंग फाइनेंस को सस्ता और ज्यादा अफोर्डेबल बनाने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रायरिटी सेक्टर क्लासिफिकेशन का दायरा बढ़ाया जा सकता है, अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए लोन की लिमिट बढ़ाई जा सकती है, कॉस्ट में कमी के लिए फीस घटाने वाले बैंकों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। जिन प्रोजेक्ट्स पर काम रुका हुआ है, उनके काम दोबारा शुरू होने से भी बायर्स पर फाइनेंशियल बोझ कम होगा। अभी वे EMI के साथ रेंट भी चुका रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में इजाफा, प्रॉपर्टी इनफ्लेशन और ज्यादा इंटरेस्ट रेट का असर घर खरीदने में लोगों की दिलचस्पी पर पड़ा है। कपूर ने कहा कि एक तरफ घर खरीदने की कुल कॉस्ट काफी बढ़ी है, जबकि लोगों की इनकम में उस अनुपात में इजाफा नहीं हुआ है। कम टैक्स रिलीफ की वजह से यंग परिवारों के सामने अनिश्चितता बनी रहती है।