Union Budget 2026: प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के उपाय शुरू करने के लिए बजट एक बड़ा मौका
जीडीपी ग्रोथ 7-8 फीसदी के बीच है, जो अच्छी कही जाएगी। लेकिन, प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर अब भी कमजोर बनी हुई है। इसका असर ग्रोथ और रोजगार के नए मौके पैदा करने पर पड़ रहा है। इससे ग्रोथ के लिए सरकारी खर्च पर निर्भरता बढ़ी है
संपत्ति के मामले में असमानता हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। लेकिन, 2014 से 2014 के बीच यह असमानता तेजी से बढ़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बीते एक दशक में प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई रिफॉर्म्स किए हैं। इनमें बैंकों की बैलेंसशीट की सफाई, कॉर्पोरेट टैक्स के रेट्स में कमी, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर में इजाफा और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी स्कीम शामिल हैं। सालाना 12 लाख तक की इनकम को टैक्स-फ्री किया है और डिमांड बढ़ाने के लिए जीएसटी के रेट्स में कमी की है।
प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर नहीं बढ़ रहा
जीडीपी ग्रोथ 7-8 फीसदी के बीच है, जो अच्छी कही जाएगी। लेकिन, प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर अब भी कमजोर बनी हुई है। इसका असर ग्रोथ और रोजगार के नए मौके पैदा करने पर पड़ रहा है। इससे ग्रोथ के लिए सरकारी खर्च पर निर्भरता बढ़ी है। सवाल है कि आखिर प्राइवेट सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर क्यों नहीं बढ़ रहा?
सरकार के उपायों का कुछ सेक्टर को फायदा
सरकार ने बेसिक इंडस्ट्रीज की मदद के लिए इंपोर्ट पर बंदिशें लगाई हैं। क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स लागू करने के साथ ही इपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई है। इससे स्टील सेक्टर में पूंजीगत खर्च में इजाफा हुआ है। लेकिन, इससे कॉस्ट बढ़ी है, जिसका असर एमएसएमई सहित स्टील का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ा है। इससे कुल प्राइवेट कैपेक्स ग्रोथ प्रभावित हुई है।
टैक्स कंप्लायंस ने छोटे बिजनेसेज के लिए बढ़ाई दिक्कत
घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को सस्ते आयातकों से सुरक्षा प्रदान करने में कमजोर रुपया मददगार है। रुपये में कमजोरी की वजह से इंपोर्ट करना महंगा हो जाता है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने के अलावा कंप्लायंस की वजह से भी प्राइवेट इनवेस्टमेंट में बाधा आती है। टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार फाइलिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ी जरूरतें बढ़ा रही है। लेकिन, इससे छोटे बिजनेसेज को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जीएसटी के कुछ नियमों में बदलाव की जरूरत
एक देश, एक टैक्स का वादे के बावजूद बिजनेसेज को अलग-अलग राज्य में जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इससे छोटे बिजनेसेज पर कॉस्ट बढ़ जाती है। इसमें कोई संदेर नहीं कि एमएसएमई की बाजार हिस्सेदारी घट रही है, जिसका असर देश में कुल कैपेक्स ग्रोथ पर पड़ेगा। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) ने कंपनी के रजिस्ट्रेशन को आसान बनाया है। लेकिन, अगर कोई कंपनी अपने बिजनेस एड्रेस को एक राज्य से बदलकर दूसरे राज्य में करना चाहती है तो यह बहुत मुश्किल है।
संपति के मामले में असमानता तेजी से बढ़ी है
संपत्ति के मामले में असमानता हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। लेकिन, 2014 से 2014 के बीच यह असमानता तेजी से बढ़ी है। गरीब परिवारों के मुकाबले समृद्ध परिवार का झुकाव कंजम्प्शन के मामले में कम होता है। इसका असर डिमांड जेनरेशन और प्राइवेट इनवेस्टमेंट पर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंटरेस्ट रेट घटाने से कैपेक्स बढ़ेगा। लेकिन, इस साल फरवरी से आरबीआई के रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स की कमी करने के बाद भी प्राइवेट कैपेक्स अनिश्चित बना हुआ है।
रोजगार के मौके बढ़ाने से बेहतर होंगे हालात
रोजगार के मौकों को बढ़ाकर स्थिति से निपटा जा सकता है। इससे कंज्यूमर डिमांड बढ़ेगी और प्राइवेट कैपेक्स को भी बढ़ावा मिलेगा। देश में अभी एंप्लॉयमेंट से जु़ड़ी इनसेंटिव स्कीम की जरूरत है। हालिया लेबर लॉज रिफॉर्म्स से प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा। कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने के मकसद से जीएसटी में कमी स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन, 5 फीसदी टैक्स के तहत आने वाले आइटम्स पर आईटीसी के बगैर कीमतों में कमी नहीं आएगी।
प्राइवेट इनवेस्टमेंट के उपायों के लिए बजट बड़ा मौका
ग्लोबल ट्रेड को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत-अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत की रफ्तार सुस्त है। ऐसे में प्राइवेट कैपेक्स बढ़ाने में घरेलू डिमांड की बड़ी भूमिका जरूरी है। इसके लिए कंजम्प्शन पर इफेक्टिव टैक्स में कमी जरूरी है। कैपिटल की कॉस्ट बढ़ाने से मदद मिलेगी। एमएसएमई पर कंप्लायंस का बोझ घटाने से भी फायदा होगा। इससे प्राइवेट कैपेक्स बढ़ सकता है। यूनियन बजट 2026 इन प्राथमिकताओं पर ध्यान देने का बड़ा मौका है।
रितेश कुमार सिंह
(लेखक बिजनेस इकोनॉमिस्ट और इंडोनॉमिक्स प्राइवेट कंसल्टिंग प्राइवेट के सीईओ हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। उसका इस पब्लिकेशन से संबंध नहीं है)