चीन का हाई-स्पीड रेलनेटवर्क, एआई का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल और इनोवेटिव ईकोसिस्टम का कोई मुकाबला नहीं है। हाल में चीन की अपनी यात्रा के दौरान चीन में कामकाज की रफ्तार को देखकर मैं दंग रह गया। मेरी यात्रा के दौरान चीन में सरकार ने 15वीं फाइव-ईयर प्लान पेश किया। यह प्लान पिछले कई दशकों से चीन में विकास की दिशा तय कर रहा है। मैंने इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर नजर डाली जिसमें अनिश्चितता के बीच मौके शामिल रहे हैं।
इकोनॉमी का अच्छा प्रदर्शन
अमेरिका के ज्यादा टैरिफ का असर भारत पर पड़ा है। बेरोजगारी बढ़ रही है। ऐसे में यूनियन बजट 2026 भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिहाज से एक बड़ा मौका है। बीते एक साल में इंडियन इकोनॉमी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इंडिया की जीडीपी 4 लाख करोड़ डॉलर के पार निकल गई है। सबसे ज्यादा ग्रोथ वाली इकोनॉमी के रूप में इंडिया ने अपनी स्थिति मजबूत की है। तिमाही ग्रोथ 6.6 से 8 फीसदी के बीच रही है।
इंडिया की तेज ग्रोथ में घरेलू मांग का बड़ा हाथ रहा है। प्राइवेट कंजम्प्शन करीब 7 फीसदी बढ़ा है। इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने का इसमें हाथ रहा है। सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया है। इससे रिटेल एक्टिविटी बढ़ी है। एफएमसीजी वॉल्यूम में इजाफा हुआ है। फेस्टिव सीजन की सेल रिकॉर्ड 6.05 लाख करोड़ पर पहुंच गई है। आरबीआई ने FY26 में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया है।
इसके बावजूद कई ऐसी खामियां हैं, जिन पर अगले यूनियन बजट में ध्यान देने की जरूरत है। भारत के लिए एक्सटर्नल रिस्क बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई इंडियन गुड्स पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इसका दबाव इंडिया के ट्रेड बैलेंस पर पड़ा है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है। लेकिन, अभी अनिश्चितता बनी हुई है। लेबर मार्केट को लेकर चिंता बनी हुई है। FY25 में बेरोजगारी की दर औसतन 7 और 8 फीसदी रही है। युवाओं में बेरोजगारी की दर काफी ज्यादा है।
FY25 में रुपये में आई कमजोरी ने दबाव और बढ़ाया है। दिसंबर में यह 91 के पार निकल गया। इससे पहले रुपया कभी इस लेवल पर नहीं आया था। इससे इंपोर्ट की कॉस्ट खासकर एनर्जी और रॉ मैटेरियल की कॉस्ट बढ़ी है। इसका असर एमएसएमई पर पड़ा है। साथ ही महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा हुई है।
ग्रोथ के लिए रिफॉर्म्स पर फोकस
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के अगले बजट में ग्रोथ बढ़ाने वाले रिफॉर्म्स पर फोकस होना चाहिए। साथ ही बेरोजगारी की समस्या को हल करने के उपाय होने चाहिए। एमएसएमई सेक्टर खासकर टियर 2 और टियर 3 शहरों में छोटे उद्यमों का आधुनिकीकरण जरूरी है। डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शुरू किया जा सकता है। एआई-आधारित प्रोडक्टिव टूल्स अपनाए जा सकते हैं। लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के कदम उठाए जाने चाहिए।
टैक्स के नियम आसान होने से कंजम्प्शन बढ़ेगा
कंजमप्शन को बढ़ाने के उपाय भी बजट में होने चाहिए। टैक्स के नियमों को आसान बनाने से परिवारों पर दबाव घटेगा और शहरों में डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग बढ़ेगा। घरेलू डिमांड बढ़ाने के उपायों के केंद्र में देश का मिडिल क्लास होना चाहिए। एक्सटर्नल स्टैबिलिटी क्रूड ऑयल की कीमतों को लेकर व्यावहारिक अनुमान पर निर्भर है।
प्राइवेट सेक्टर को मजबूत बनाने से आएगी आत्मनिर्भरता
इंडिया अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। भारत को अपने प्राइवेट सेक्टर को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ने की जरूरत है। अगर इन उपायों पर फोकस किया जाता है तो अगला यूनियन बजट भारत को विकसित देश के लक्ष्य की तरफ तेज रफ्तार से बढ़ने में मददगार साबित हो सकता है।
(लेखक प्रमुख ग्रोथ इक्विटी फंड आयरन पिलर में स्पेशल एडवाइजर हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार है। उसका इस पब्लिकेशन से संबंध नहीं है)