क्या बजट 2026 से तय होगी अगले रेट कट की स्पीड? ज्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में अधिक गुंजाइश

Budget 2026: भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल पॉलिसी रेट में 4 बार कटौती की। IIFL कैपिटल का कहना है कि RBI के पास 2026 में ब्याज दर में और 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गुंजाइश है। आने वाला बजट मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के हिसाब से रहने की संभावना है

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 4:08 PM
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वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है।

बजट 2026 मैक्रो पॉलिसी के लिए एक नाजुक मोड़ पर है। जहां एक ओर सरकार से पब्लिक खर्च बढ़ाने और खपत को बढ़ावा देने की बढ़ती मांग है, वहीं दूसरी ओर एनालिस्ट्स का कहना है कि फिस्कल क्रेडिबिलिटी बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कम ब्याज दरें, घरेलू डिमांड और प्राइवेट सेक्टर क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए एक और अहम पिलर बनी हुई हैं। यह बैकग्राउंड एक साल पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सपोर्टिव है। RBI ने पिछले साल पॉलिसी रेट में 4 बार कटौती की। इसके चलते रेपो रेट अपने पीक 6.5 प्रतिशत से कुल 125 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 5.25 प्रतिशत पर आ गई।

ग्लोबल लेवल पर भी मॉनेटरी साइकिल अकोमोडेटिव हो गया है। US फेडरल रिजर्व ने 2025 में 3 बार बेंचमार्क रेट घटाई। इस माहौल में, इकोनॉमिस्ट्स का मानना ​​है कि अगर बजट एक भरोसेमंद राजकोषीय घाटे के रास्ते पर चलता है और एक मैनेजेबल बॉरोइंग प्रोग्राम लाता है, तो इससे RBI को मॉनेटरी पॉलिसी के जरिए ग्रोथ को सपोर्ट करने की क्षमता को मदद मिलेगी।

बजट 2025 के वक्त के हिसाब से बदल चुके हैं हालात


बजट 2025 के आसपास पॉलिसी रेट सख्त स्तर पर थीं। फरवरी 2025 में कटौती से पहले रेपो रेट 6.50 प्रतिशत थी। हालांकि, बजट 2026 आते-आते बहुत ज्यादा ढील देने वाला साइकिल बन चुका है, जिससे पॉलिसी बनाने वालों को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि फिस्कल डिसिप्लिन बना रहे। 14 इकोनॉमिस्ट्स, बैंक ट्रेजरी हेड और फंड मैनेजर्स के इनवॉल्वमेंट वाले मनीकंट्रोल के पोल के मुताबिक, RBI से उम्मीद है कि वह फरवरी के पॉलिसी रिव्यू में रेट पर यथास्थिति बनाए रखेगा। रुख न्यूट्रल रखेगा, जिससे साल में बाद में और कटौती के लिए दरवाजा खुला रहेगा।

फिस्कल क्रेडिबिलिटी RBI के रेट-कट साइकिल को तेज कर सकती है

मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमण्यम का कहना है कि आने वाला बजट मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के हिसाब से रहने की संभावना है। सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन पर समझदारी से काम लेगी। फिर चाहे वह राजको​षीय घाटे का रेशियो हो या GDP के हिस्से के तौर पर केंद्र सरकार की उधारी। साथ ही उपलब्ध फिस्कल स्पेस का इस्तेमाल कैपेक्स और खपत पर बेस्ड ग्रोथ के लिए किया जा सकता है।

INVasset PMS के हर्षल दसानी ने कहा कि अगर बजट दो खास बातों पर जोर देता है तो यह RBI को रेट कट की रफ्तार तेज करने में इनडायरेक्टली मदद कर सकता है। ये दो खास बातें हैं- फिस्कल क्रेडिबिलिटी और एक साफ, कैपेक्स-लेड ग्रोथ मिक्स। दसानी ने कहा कि बजट ऐसा हो जो विश्वसनीय राजकोषीय घाटा ग्लाइड पाथ पर टिका रहे, महंगाई बढ़ने के जोखिम से बचाए और उधारी कार्यक्रम को नियंत्रण में रखे, तो मौद्रिक नीति के लिए बॉन्ड बाजार पर दबाव डाले बिना आर्थिक वृद्धि को सपोर्ट देना आसान हो जाता है।

Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations Live

भारत के पास अपने साथियों की तुलना में रेट कट की ज्यादा गुंजाइश

दसानी ने कहा कि भारत के पास ज्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रेट कट की ज्यादा गुंजाइश है। लेकिन बजट का फिस्कल रुख यह तय करेगा कि RBI उस गुंजाइश को स्पीड में बदल सकता है या नहीं। IIFL कैपिटल का भी कहना है कि RBI के पास 2026 में ब्याज दर में और 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गुंजाइश है। रेपो रेट और कोर खुदरा महंगाई के बीच का अंतर अभी 2.8 प्रतिशत है। यह 7 साल के एवरेज 1.1 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। यह बढ़ा हुआ बफर आगे मॉनेटरी ईजिंग की गुंजाइश बनाता है।

गोल्डमैन सैक्स ने भी कहा कि अगर ट्रेड से जुड़ी मुश्किलें वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बाद भी बनी रहती हैं और ग्रोथ पर असर डालना शुरू कर देती हैं, तो RBI अपने बचे हुए पॉलिसी स्पेस का इस्तेमाल और सपोर्ट देने के लिए कर सकता है।

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