भारत की उभरती प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री ने सरकार से स्पेस एसेट्स को 'क्रिटिकल इंफास्ट्रक्चर' का दर्जा देने की अपील की है। साथ ही घरेलू कंपनियों द्वारा पेश किए जाने वाले प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की खरीद के लिए फंड एलोकेट करने की मांग की है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पिक्सेल स्पेस के फाउंडर और सीईओ ओवैस अहमद का कहना है कि एक बड़े मुख्य ग्राहक के रूप में, मुझे लगता है कि सरकार का सपोर्ट मिलना जरूरी है। सरकार ने अनुसंधान, विकास, इनोवेशन फंड और डीप-टेक फंड शुरू करके अच्छे कदम उठाए हैं।
इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) और परामर्श फर्म डेलॉयट ने सिफारिश की है कि सरकार स्पेस एसेट्स को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में मान्यता दे, ताकि इस क्षेत्र के लिए कम लागत वाली लॉन्ग टर्म फाइनेंसिंग मिल सके। स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर टेलीकम्युनिकेशन, रक्षा, नेविगेशन, फाइनेंस, मौसम की भविष्यवाणी, आपदा प्रबंधन और गवर्नेंस को सपोर्ट करता है। उन्होंने कहा कि औपचारिक मान्यता से इंफ्रास्ट्रक्चर-ग्रेड फाइनेंसिंग संभव होगी, पूंजी की लागत 2-3 प्रतिशत कम होगी, और नेशनल रिजीलिएंस मजबूत होगा। ISpA ने कहा है, "स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर को एक अलग इंफ्रास्ट्रक्चर सब-सेक्टर के रूप में मान्यता देना इसके विस्तार, प्राइवेट इनवेस्टमेंट और ग्लोबल कॉम्पिटीटिवनेस के लिए जरूरी है।"
संगठन ने कहा कि भारतीय प्राइवेट कंपनियों के पास अब उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम्स और ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रमाणित क्षमताएं हैं। लेकिन सरकार की ओर से मांग के आश्वासन की कमी के कारण वे खुद को बढ़ा नहीं पा रही हैं। खरीद का एक औपचारिक आदेश उद्योग के विकास को गति देगा और इससे इसरो को रणनीतिक व खोजी मिशनों पर फोकस करने में मदद मिलेगी। बजट 2026 को 1 फरवरी को पेश किया जाना है।
क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के दर्जे से लो कॉस्ट फंडिंग संभव
ISpA ने यह भी कहा कि नासा अपने 80 प्रतिशत सिस्टम्स प्राइवेट इंडस्ट्री से खरीदता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) भी 90 प्रतिशत खरीद इंडस्ट्री से करती है। अग्निकुल कॉसमॉस के फाउंडर और सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन के मुताबिक, "स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मानने से कम लागत वाली फंडिंग मिल सकती है, जबकि डीप टेक के लिए टैक्स और शुल्कों को तर्कसंगत बनाने से लागत का दबाव काफी कम हो जाएगा।" आगे कहा कि इसरो और इन-स्पेस के साथ आउटकम-बेस्ड सहयोग और लॉन्ग टर्म खरीद पर स्पष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
गैलेक्सीआई के को-फाउंडर और सीईओ सुयश सिंह का कहना है कि स्वदेशी उपग्रह निर्माण और पेलोड डेवलपमेंट के लिए लक्षित वित्तीय प्रोत्साहन और सरकार के सपोर्ट वाली फंडिंग शुरुआती डिप्लॉयमेंट के जोखिम को कम कर सकती है।